विनम्रशील से दुनिया ही नहीं परमात्मा करते हैं प्रेम
मुनि विनम्र सागर महाराज ने प्रवचन देते हुए कहा कि विनम्रशील से दुनिया ही नहीं परमात्मा भी प्रेम करता है। मगर अहंकारियों से ईश्वर, दुनिया तो छोड़ों उनके बच्चे भी प्रेम नहीं करते हैं।
छदामीलाल जैन मंदिर में मुनि महाराज ने कहा कि यदि अहंकार का विष जीवन में न हो तो घरों में भी झगडे़ न हों। घरों के टुकडे़ नहीं होंगे। अहंकार की दुर्गंध अज्ञान की अंधेरी गलियों में आती है। उन्होंने कहा कि अंधेरे में प्रकाश जा सकता है, मगर प्रकाश में अंधेरा नहीं जा सकता। वैसे ही अहंकार में ज्ञान आ सकता है, लेकिन ज्ञान में नहीं। अभिमान ऐसा विष है जो कई जिंदगी तबाह कर देता है। लेकिन विनम्रता और मृदुता ऐसा अमृत है, जो अजर अमर बना सकता है। उन्होंने कहा कि दूसरों के अपमान में हमारे अंदर का मद आवेश में बाहर आता है। वो अभिमान बन जाता है। विनम्रभाव हमारी विरासत को प्राप्त कराता है और अहंकार हमारे चारो ओर आफत का माहौल बना देता है।
फरिहा, मरसलगंज मंदिर में हो रहे धार्मिक कार्यक्रम
दशलक्षण पर्व के मौके पर तीर्थक्षेत्र मरसलगंज एवं बड़ा जैन मंदिर फरिहा में धार्मिक कार्यक्रमों की धूम मची है। सुबह से ही श्रद्धालु पूजा-अर्चना करने के लिए मंदिर में आते हैं। दोपहर में अशोक पांडेय के नेतृत्व में पाठ किया जा रहा है। सायं को आरती एवं भजन संध्या का आयोजन भी मंदिरों में हो रहा है। बच्चों की प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता भी कराई जा रही है। गुड्डू जैन, पारस जैन, अरविंद प्रताप जैन, प्रिंस जैन, नरेंद्र जैन, नीतेश जैन, पवन जैन, गोपाल जैन आदि रहे।