इंटरसिटी एक्सप्रेस से बच्चों को मानव तस्करी के लिए ले जाने की सूचना पर 21 बच्चों को चार अन्य लोगों के साथ राजकीय रेलवे पुलिस ने टूंडला रेलवे स्टेशन पर ट्रेन से उतार लिया। चाइल्ड वेलफेयर सोसायटी व पुलिस ने जांच के बाद बच्चों को उनके साथ यात्रा कर रही मदरसे की संचालिका के सुपुर्द कर दिया गया। बताया गया है कि गर्मियों की छुट्टियां होने पर बच्चे अपने घर बिहार वापस लौट रहे थे।
मामला बुधवार सुबह करीब आठ बजे का है। रेलवे नियंत्रण कक्ष टूंडला को सूचना मिली कि आगरा से चलकर लखनऊ जाने वाली इंटरसिटी एक्सप्रेस के जनरल कोच में 21 बच्चों को आगरा से बिहार ले जाया जा रहा है। बच्चों को विदेश ले जाने की योजना है। इससे रेल प्रशासन में हड़कंप मच गया। तत्काल राजकीय रेलवे पुलिस को घटना की जानकारी दी गई। राजकीय रेलवे पुलिस के उपनिरीक्षक मणिकांत शर्मा ने बताया कि टूंडला स्टेशन पर घेराबंदी कर 21 बच्चों के साथ चल रहे चार युवक और एक महिला को ट्रेन से उतार लिया गया। इनमें 20 लड़कियां व एक लड़का था, जिनकी उम्र सात वर्ष से लेकर 14 वर्ष के बीच थी। सभी को जीआरपी थाने ले जाया गया। चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी व अधिकारियों को जानकारी दी गई। पूछताछ के दौरान पता चला कि बच्चे आगरा के रुनकता स्थित एक मदरसे में पढ़ते हैं। सभी मूलरूप से बिहार के रहने वाले हैं।
गर्मियों की छुट्टियां होने पर मदरसा संचालक नजमा खातून पत्नी शेख इब्राहिम निवासी अदकपटिया थाना रामगढ़वा बिहार उन्हें घर ले जा रही थी। सभी बच्चों को चाइल्ड वेलफेयर सोसाइटी के चेयरमैन के आदेश पर मदरसा संचालिका नजमा खातून की सुपुर्द कर दिया गया।
बिहार की सीधी ट्रेन में सवार न होने पर गहराया था शक
टूंडला। ट्रेन से उतारे गए बच्चों सहित मदरसा संचालिका द्वारा बिहार जाने की कहने पर पुलिस का शक गहरा गया था। पुलिस का कहना था कि जिस ट्रेन में बच्चे सवार थे वह ट्रेन आगरा से लखनऊ तक जाती है, जबकि बच्चों को बिहार ले जाया जा रहा था। बिहार जाने के लिए आगरा से कई ट्रेनें हैं, फिर इस ट्रेन को क्यों चुना गया। पूछताछ के दौरान मदरसा संचालिका ने अन्य ट्रेनों में जगह न मिलने की बात कही थी।