टूंडला। होली से पूर्व घर पहुंचने की सभी को जल्दी है। इसी के चलते ट्रेनों में काफी भीड़ है। इस दौरान लोग अपनी जान की परवाह किए बिना ट्रेनों के कोचों के गेट पर लटकर भी यात्रा कर रहे हैं। रेलवे पुलिस इन यात्रियों को अंदर बैठने व गेट बंद कर यात्रा करने के लिए प्रयास कर रही है।
होली पर्व पर सभी की इच्छा रहती है कि वह इस पर्व को अपने परिवार के साथ-साथ यार-दोस्तों के साथ मिलजुल कर मनायें। इसके लिए पूर्व से तैयार लोग तो पहले से ही आरक्षण आदि करवाकर अपने घरों पर पहुंच चुके हैं तथा पहुंच रहे हैं। होली से पूर्व ही छटा देखने व होली से पूर्व आयोजित होने वाले कार्यक्रमों में भाग लेने छोटी-मोटी प्राइवेट नौकरी वाले व मजदूर टाइप लोग होली से पूर्व अपनी उपस्थिति दर्ज करवाने घर के लिए रवाना हो रहे हैं, मगर ट्रेनों में भारी भीड़ होने के कारण लोगों को ट्रेन के डिब्बे में प्रवेश करने तक की जगह नहीं मिली रही है।
ट्रेनों का आलम यह है कि डिब्बों के शौंचालय, दो कोचों के बीच वाला खाली स्थान, डिब्बे के दरबाजों पर लगे हैंडिल और उसके बाद भी लोगों को जगह नहीं मिली तो लोग जिंदगी की परवाह किए वगैर ट्रेनों की पायदानों पर पैर लटकाकर बैठते हुए यात्रा कर रहे हैं। इस दौरान ट्रेनों के जनरल कोचों की हालत बेहद खराब है। इन कोचों में एक के ऊपर एक यात्री ठुंसे से प्रतीत हो रहे हैं। इस संदर्भ में जीआरपी प्रभारी अमित कुमार ने बताया कि ट्रेनों में लटकते यात्रियों को अंदर चढऩे के लिए हररोज प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि कोई घटना न हो, फिर ट्रेन के चलने पर यात्री स्वयं जान जोखिम में डालते हुए लटक जाते हैं।
सभी ट्रेनों में आरक्षण हैं अप्रैल तक फुल, वेटिंग भी सौ के पार
टूंडला। होली पर सुविधाजनक स्थित में घर जाने के लिए लोगों ने दो माह पूर्व ही अपने आरक्षण करा लिए थे। सीआरएस समर्थलाल मीणा के मुताबिक लंबी दूरी की सभी प्रमुख ट्रेनों में आरक्षण 30 अप्रैल तक आरक्षण फुल चल रहे हैं। इतना ही नहीं वेटिंग भी 100 से लेकर डेढ़ सौ तक चल रही है। संवाद
भीड़ को देखते हुए रेलवे ने चलाईं होली विशेष ट्रेनें
टूंडला। होली जैसे महापर्व पर ट्रेनों में भीड़ की स्थिति को देखते हुए कई होली विशेष ट्रेनें चलाई हैं। होली विशेष ट्रेनों के चलते रेलयात्रियों को कुछ हद तक राहत मिली है, किंतु इन ट्रेनों के समय से न चलने एवं जानकारी के अभाव में सामान्य तौर पर चलने वाली मेल, एक्सप्रेस ट्रेनों में भारी भीड़ है। संवाद