फिरोजाबाद। जिले भर में मकानों की गणना और हाउस नंबर दर्ज करने के लिए प्रगणकों ने घर-घर दस्तक देना शुरू कर दिया है। हालांकि, तकनीकी और भौगोलिक दिक्कतों के कारण शुरुआत में ही प्रगणकों के पसीने छूट रहे हैं। सबसे बड़ी समस्या अपने हाउसिंग ब्लॉक का सटीक मानचित्र (मैप) तैयार करने में आ रही है। प्रगणक यह तय ही नहीं कर पा रहे हैं कि उनके ब्लॉक में कौन-कौन सी गलियां शामिल हैं, जिससे काम की रफ्तार काफी धीमी है।
जनपद के 4,459 ब्लॉकों में यह काम चल रहा है। ग्रामीण अंचल में एक-एक गांव होने के कारण नक्शा खींचने में ज्यादा दिक्कत नहीं आ रही है, लेकिन शहरी क्षेत्रों में ऑनलाइन मैपिंग के जरिए गलियों का निर्धारण होने से प्रगणक उलझ गए हैं। इस काम के लिए प्रगणक पहले रजिस्टर पर कच्ची रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं और फिर घर आकर उसे ऑनलाइन फीड कर रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक शिक्षक ने बताया कि वे दो साथी मिलकर काम कर रहे हैं। सुबह एक के क्षेत्र में और शाम को दूसरे के क्षेत्र में जाते हैं, जिससे जनता के सवालों का सामना करना आसान हो जाता है।
स्कूटी पर बेटी तो साथ में पति संभाल रहे मोर्चा
जनगणना के इस कठिन कार्य में तैनात बुजुर्ग आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और महिला शिक्षिकाएं अपने परिवार का सहारा ले रही हैं। कोई शिक्षिका अपनी बेटी के साथ स्कूटी पर सवार होकर ब्लॉक में पहुंच रही है, तो कई महिलाओं की मदद उनके पतिदेव कर रहे हैं ताकि गणना का काम जल्द से जल्द पूरा हो सके। हालांकि, सुपरवाइजर और चार्ज अफसरों की टीमें भी प्रगणकों का सहयोग कर रही हैं।
जिले में मकान सूचीकरण का काम तेजी से संचालित किया जा रहा है। कुछ शहरी क्षेत्रों में मानचित्र (नक्शा) बनाने में दिक्कत आने की जानकारी मिली है, लेकिन सुपरवाइजर और चार्ज अधिकारी की टीमें मौके पर प्रगणकों का पूरा सहयोग कर रही हैं। काम समय से पूरा कर लिया जाएगा।
- कल्पना जायसवाल, एडीएम एवं जिला जनगणना अधिकारी, फिरोजाबाद