काश! घरवालों की बात मान लेते...
फिरोजाबाद। कहावत है कि होनी को कोई नहीं टाल सकता। कुछ ऐसा ही मां बेटी और चालक ललित के साथ हुआ। परिजनों ने बताया कि रात होने के कारण तीनों को कानपुर जाने के लिए मना किया था। इसके बाद भी वे नहीं माने और रात करीब साढ़े आठ बजे तीनों लोग कार से कानपुर के लिए रवाना हुए थे।
आशा ने अपनी बेटी हेमा का विवाह तीन साल पूर्व किया था। शादी के तीन साल बाद भी हेमा के कोई संतान नहीं थी। हेमा का पति सुमित परचून की दुकान कर परिवार का भरण पोषण करता है। हेमा के पिता शिवकरन सिंह ने बताया कि वह मूलरूप से कानपुर देहात रसूलाबाद के रहने वाले हैं। वर्तमान में कानपुर नौबस्ता गल्ला मंडी स्थित सागरपुरी चौराहा के समीप रहते हैं। ललित उनका पड़ोसी है। शिवकरन ने बताया कि स्वास्थ्य ठीक न होने के कारण उनकी पत्नी आशा देवी बेटी हेमा को लेने के लिए सोमवार को ललित को लेकर कार से जयपुर गई थी। जयपुर से चलने के दौरान हेमा ने फोन भी किया था कि सुबह वह घर पहुंच जाएंगी, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था।
पत्नी और बेटे को छोड़ गई आशादेवी
आशादेवी के पति शिवकरन सिंह ने बताया कि उस पर एक बेटा और एक बेटी थी। हादसे में बेटी और पत्नी की मौत के बाद वह पूरी तरह से टूट गया। बेटा शिवम की उम्र करीब 21 साल है। उसकी अभी शादी नहीं हुई है। आशा देवी का मायका बर्रा कानपुर में है।
दो भाइयों में छोटा था ललित
ललित दो भाइयों में छोटा था। बड़ा भाई ट्रक चलाकर परिवार का भरण पोषण करता है। जबकि ललित की अभी शादी नहीं हुई थी। वह एक कंपनी में काम करने के साथ ही मां बाप के साथ कानपुर में ही निवास करता था। बेटे की मौत के बाद माता पिता का रो-रोकर बुरा हाल है।
एक माह पहले कार खरीदकर लाया था उत्तम
ललित उत्तम अपने बड़े भाई ट्रक चालक देवेश, भाभी ममता देवी के साथ छह माह पहले ही सुंदर नगर में मकान बनवाकर रहने आया था। ममेरे भाई सौरभ ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे सिरसागंज थाने से फोन आया तो घटना की जानकारी हुई। हादसे में उत्तम की मौत की खबर सुनकर भइया, भाभी व परिवार के अन्य सदस्य फिरोजाबाद के लिए रवाना हो गए। पोस्टमार्टम के बाद ललित के शव को गृह जनपद ले जाया जाएगा।
छह माह पहले सुंदर नगर में रहने आई थीं आशा
आशा देवी की पड़ोसी रानी मिश्रा ने बताया कि नवरात्र में ही वे बेटे संग रहने यहां आई थीं। इससे पहले बर्रा में रहती थीं। बेटे के काम पर जाने के बाद ज्यादातर समय घर में ही बिताती थीं। मोहल्ले में ज्यादा किसी से मेलजोल नहीं था। कुछ दिन पहले से उन्होंने भी कहीं काम पर जाना शुरू किया था। उनके पति गांव में रहते थे। कभी-कभी यहां आया करते थे।