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यहां तो कदम कदम पर होता है मानवाधिकार हनन

Tue, 09 Dec 2014 11:41 PM IST
Here is the step on human rights abuses
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मानवाधिकार सरकारी कागजों में सिर्फ देखने और संभालने के लिए रह गए हैं। आजाद के 67 साल मनाने के बाद भी ऐसा मौका नहीं आया जब हम अपने अधिकार मिलने पर खुशी में इकट्ठे हुए हैं। यानि सिर्फ फाइलों और भाषणों में वक्ता की शोभा बढ़ाने वाले मानवाधिकार जमीनी धरातल पर नहीं चमक पाए। इसमें नियम बनाने वालों का दोष नहीं बल्कि अधिकारों का हनन करने वाले निरंकुश व्यक्ति, संस्था या संगठन ही हैं।
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फीरोजाबाद। पुलिस कार्यालय हो अथवा थाने व चौकियां हर जगह मानवाधिकार आयोग के नियमों के लंबे- चौड़े बोर्ड तो लगे दिखाई देते हैं। लेकिन खाकी इनका पालन करना भूल जाती है। नियम यही है कि थाने आने वाला फरियादी यदि कहीं दूसरे थाना क्षेत्र का भी है तो उसकी निल पर रिपोर्ट दर्ज करके दूसरे थाने को स्थानांतरित कर सकते हैं। दूसरे थाने की छोड़ो अपने थाने की रिपोर्ट दर्ज करने में आनाकानी करती है।

- केस वन
मटसेना क्षेत्र में श्रमिक की मौत के बाद न्याय मांगने को जब पीड़ित श्रमिक के परिवार ने सुभाष तिराहे पर जाम लगाने का प्रयास किया तो पुलिस मानवाधिकार का पालन करना भूल गई। महिला को घसीटा और लात, घूसों से पिटाई की। मामला काफी उलझा परंतु नतीजा कुछ भी हासिल नहीं हुआ। घटना को याद करके पीड़ित परिवार आज भी सहम जाता है।
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-केस दो
बाइक चोर शिवम की गिरफ्तारी को पूनम किन्नर के यहां दबिश देने गई पुलिस ने मानवाधिकार का पालन करना ही भूल गई। किन्नर को घटना की जानकारी ही नहीं थी। इसके बावजूद बाइक जबरन उठा ले गई, इस पर किन्नरों ने विरोध दर्ज कराया था।

कारागार-
क्षमता 670, बंदी 1700 से अधिक
670 क्षमता वाले जिला कारागार में 1700 के करीब बंदी हैं। एक बैरक में रात के समय 120 से अधिक बंदी और कैदी बंद किए जाते हैं। नियमानुसार 60 बंदी और कैदियों को ही रखना चाहिए। जिला कारागार से न्यायालय लाने के दौरान उन्हें वाहन में ठूंस- ठूंसकर बैठाया जाता है।

शौचालय-
2.21 लाख परिवार करते खुले में शौच
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वच्छ भारत मिशन की बात करें तो जिले में बेस लाइन सर्वे की रिपोर्ट में दो लाख 63 हजार 622 परिवारों का सर्वे हुआ। 42,074 परिवारों में शौचालय बनें हैं जबकि दो लाख 21 हजार 548 परिवार खुले में ही शौच करने को विवश हैं।

परिवहन-
ग्रामीण परिवहन सुविधा से वंचित
ग्रामीण जनता को आज भी प्राइवेट वाहनों के भरोसे ही सफर करना पड़ता है। कई प्रमुख मार्ग जैसे कोटला फरिहा, एका, फीरोजाबाद से मटसेना, फतेहाबाद मार्ग एवं फीरोजाबाद जलेसर मार्ग पर भी पर्याप्त मात्रा में सरकारी बसें नहीं चलती हैं।

पानी-
यहां पीने को नसीब नहीं
सुहागनगरी में पीने के लिए शुद्ध पानी नहीं मिलता। सुबह से ही पानी को लेकर हर रोज मारामारी होती है। जरूरत 70 एमएलडी पानी की है परंतु 45 से 50 एमएलडी पानी मुहैया करा रहे हैं। नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद भी हालात नहीं सुधर सके।

बिजली-
रोशनी को तरसते हैं गांव
शहरी क्षेत्र में 24 घंटे बिजली देने की योजना चल रही हो, लेकिन गांवों में आज भी शाम होते ही केरोसिन के दीये उजाला करते हैं। उन्हें एक बल्ब जलाने के लिए भी बिजली नहीं मिल पाती। हालांकि, राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना के तहत 1,943 गांव व मजरों को विद्युतीकरण करने का प्रावधान है।

शिक्षा-
बाल अधिकार को हर रोज होता हनन
बाल अधिकार अधिनियम तो लागू कर दिए गए। लेकिन इनका पालन एक भी दिन नहीं किया गया। यहां तक कि बच्चों को उम्र से पहले पढ़ाना, बैग का बोझ भी इसमें शामिल था। लेकिन यहां तो अभिभावक से लेकर शिक्षक हनन करने में लगे हैं। हालांकि इसे लेकर मजबूरी बताते हैं। जिले में दो हजार शिक्षकों के पद खाली हैं। स्कूलों के भवन जर्जर हैं। 18 गांवों को स्कूलों की दरकार है। सर्व शिक्षा अभियान के तहत 42 नए स्कूलों की डिमांड भेजी है।

स्वास्थ्य-
न चिकित्सक, न ही स्टाफ
जिंदगी बचाने वाले डाक्टर ही न मिले तो अधिकार किसे मिलेंगे। सरकार भले जनपद में प्रतिवर्ष करोड़ों रुपये आमजन के स्वास्थ्य पर खर्च करती हो। लेकिन जिला अस्पताल में 25 स्टाफ नर्स की जरूरत है जबकि हैं सात। 156 में सिर्फ मौके पर 80 मौजूद हैं।
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मानवाधिकार आयोग के नियम
-थाने पर आए किसी भी व्यक्ति से अभद्र भाषा का प्रयोग नहीं होगा।
-न्यायालय के आदेश के बिना अपराधी को हथकड़ी नहीं लगानी चाहिए।
-हिरासत में लिए गए व्यक्ति से पूछताछ के दौरान वर्दी पर नेमप्लेट होना आवश्यक।
-गिरफ्तारी से पूर्व व्यक्ति को गिरफ्तारी का कारण भी बताना होगा।
-न्यायालय के आदेश पर ही किसी वांछित या अपराधी के घर पर पुलिस दबिश दे सकेगी। इस दौरान मजिस्ट्रेट का साथ होना आवश्यक।
-हिरासत में लिए आरोपी को 24 घंटे से अधिक हवालात में नहीं रख सकते हैं।
-पूछताछ को थाने पर बुलाए जाने वाले व्यक्ति को खाना खर्चा के साथ किराया भत्ता देने का प्रावधान।
-पूछताछ के दौरान अभद्र भाषा या मारपीट नहीं कर सकते हैं।
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