फिरोजाबाद/खैरगढ़। खैरगढ़ के गांव लालई में फैले डायरिया की खबर रविवार को अमर उजाला में प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ सीएमओ सुबह ही गांव पहुंच गए। टीम ने मरीजों को दवाएं बांटी। डायरिया के साथ गांव में वायरल बुखार का भी प्रकोप पसरा हुआ है।
महिलाएं घर का काम छोड़कर बच्चों को दवा दिलाने के लिए गांव के बाहर लगाए शिविर में पहुंचीं। किसी को सर्दी से बुखार आ रहा था, तो कोई उल्टी-दस्त से परेशान था। काफी संख्या में मरीज दवा लेने के लिए कतार में खड़े रहे। सुबह करीब दस से दो बजे तक टीम गांव में ही डटी रही। सीएमओ डॉ. एसके दीक्षित ने स्वास्थ्य टीम से जानकारी लेने के बाद ग्रामीणों से बातचीत की। ग्रामीणों को साफ-सफाई रखने की सलाह दी गई।
टीम को मिले 26 मरीज
गांव पहुंची स्वास्थ्य टीम ने सिर्फ 26 मरीजों का परीक्षण कर उन्हें दवा दी। डॉ. उमेश तिवारी ने बताया कि शिविर में 26 मरीजों का चेकअप किया गया और उन्हें दवाएं दीं। तीन मरीज डायरिया के मिले, शेष 23 मरीज संक्रामक रोग से पीड़ित थे। जो बुखार, खांसी से परेशान थे।
डायरिया से नहीं हुई बच्चों की मौत
डॉ. उमेश तिवारी का कहना है कि बच्चों की मौत डायरिया से नहीं हुई। शेर सिंह के बेटे मोहित और रानी का वजन जन्म के दौरान लगभग डेढ़ किलो था। इनको कम से कम सात दिनों तक मशीन में रखा जाना था। अनुज की मौत दोनों किडनी फेल होने के कारण हुई।
बच्चों से उठवाए दवा का कार्टून
स्वास्थ्य विभाग के शिविर के दौरान गांव लालई में बच्चों से दवा के कार्टून उठवाए गए। टीम दवाओं को कार्टूनों में भरकर एंबुलेंस में रखकर लाई थी। एबुलेंस से दवा लाने में बच्चों को लगा दिया।
हर गली में गंदगी, नालियों में पानी के पाइप
गांव लालई में हर तरफ गंदगी और जलभराव है। इस गंदगी और जलभराव के बीच ग्रामीण परिवार के साथ जीवन यापन कर रहे हैं। पानी की निकासी का कोई इंतजाम नहीं है। पानी के कनेक्शन भी गदंगी के बीच ही हैं।
शौचालयों में पड़े हैं ताले
ग्रामीणों के शौचालयों में ताले लटके हुए हैं। राम विलास और शिवदयाल के घर शौचालय तो बनवाया दिया, लेकिन टैंक नहीं बना है। इसके चलते ग्रामीणों ने शौचालयों में सामान रखना शुरू कर दिया है। कुछ शौचालयों में ताले पड़े होने के साथ ही ग्रामीण खुले में शौच जाते हैं।
खंडहर हो गया स्वास्थ्य केंद्र
करीब एक हजार की आबादी वाले गांव लालई में स्वास्थ्य सेवाओं के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया था। स्टाफ की कमी के कारण यहां पर चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी। आज यह स्वास्थ्य केंद्र खंडहर हो चुका है। केंद्र के बाहर ग्रामीणों ने खत्ताघर भी बना लिया है।