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जिला अस्पताल में पटरी पर नहीं स्वास्थ्य सेवाएं, रक्त की कई जांचें बंद, अल्ट्रासाउंड भी नहीं

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जिला अस्पताल के अल्ट्रासाउंड कक्ष में पसरा पडा सन्नाटा - फोटो : FIROZABAD
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स्वास्थ्य सुुविधाएं जिले के मरीजों को बेहतर नहीं मिल रही हैं। मेडिकल कालेज में शामिल हो चुके जिला अस्पताल में भी मरीजों को सुविधाएं नहीं मिल रही है। न खून की जांच हो रही है न ही अल्ट्रासाउंड हो रहा है यहां तो ताला ही पड़ा रहता है।
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मेडिकल कालेज बन चुके जिला अस्पताल में खून की पूरी जांच नहीं हो रही है। जब से चंदन पैथॉलॉजी का टेंडर खत्म हुआ है, तभी से यहां कई जांच बंद हो गई है। जरूरत पड़ने पर चिकित्सक इन जांचों को लिखते हैं लेकिन अस्पताल में खून की जांच की सुविधा न होने के कारण मरीजों को बाहर पैथॉलॉजी पर कराने को मजबूर होना पड़ता है।

जिला अस्पताल में खून की कई प्रमुख जांचे चंदन पैथॉलॉजी पर होती हैं लेकिन 31 मार्च को इस पैथॉलॉजी का जिला अस्पताल से करार खत्म हो गया था। टेंडर आगे नहीं बढ़ाया तो जांच बंद हो गई हैं। वर्तमान में जिला अस्पताल में गिनी-चुनी जांचे हो रही हैं। मर्ज को समझने के लिए चिकित्सक खून की जांच लिखते हैं, इन जांच को बाहर की पैथॉलॉजी पर कराना पड़ता है।
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चंदन पैथॉलॉजी का करार शासन स्तर पर था। करार नहीं बढ़ाया तो उसने जांच करना बंद कर दी। अब हमारे स्तर से जल्द ही जांच बढ़ाई जाएंगी।
डा. आरके पांडेय, सीएमएस
यह जांच नहीं हो रही हैं
- थाइराइड प्रोफाइल (टी3, टी4, टीएसएच)।
- विटामिन डीथ्री
- विटामिन बी12
- हार्मोनल जांच
- डीएनए, आरएनए (हैपेटाइटिस सकारात्मक आने के बाद की जांच)
- हीमोग्लोबिन इलेक्ट्रो,
- ट्यूमर मार्ककर (कैंसर स्थिति को जांचने के लिए)
बारिश का मौसम शुरू हो चुका है। प्राइवेट चिकित्सकों पर मलेरिया के मरीज आने लगे हैं। मगर अभी तक मलेरिया की जांच के लिए मेडिकल कालेज में किट नहीं खरीदी गई हैं। सालों पुराने पद्यति से चली आ रही स्लाइड से ही जांच कराई जा रही है। चिकित्सकों की मानें तो स्लाइड से तभी मलेरिया सकारात्मक दिखाता है, जब उसके बैक्टीरिया पूरी तरह से सक्रिय हों। शुरुआती लक्षण नहीं दिखाए जाते हैं।
अल्ट्रासाउंड कक्ष बंद रहने से जिला अस्पताल में बुधवार को मरीज भटकते रहे। जिन मरीजों का आपरेशन से पूर्व अल्ट्रासाउंड होना था, उन्हें काफी परेशानी हुई। मेडिकल कालेज की प्राचार्य डा. संगीता अनेजा ने बताया कि अल्ट्रासाउंड कक्ष में तैनात एक चिकित्सक तो सेवानिवृत्त हो चुके हैं। वहीं, दूसरे चिकित्सक के हाथ में फ्रैक्चर हो गया है। इस कारण यह समस्या आई है। उन्होंने बताया कि सेवानिवृत्त चिकित्सक की सेवाएं बढ़ाने के लिए शासन से पत्र भेजा है।
जिला अस्पताल के वार्ड में भर्ती प्रत्येक मरीज को भोजन उपलब्ध कराया जाता है। मगर अस्पताल की अनदेखी के कारण मरीजों को पूरे दिन भूखा रहना पड़ा। सीएमएस ने रात 10 बजे अस्पताल में भोजन पकवाया। रात 11 बजे के बाद भोजन वितरण हुआ। मरीजों को एक समय दूध और दो समय भोजन दिया जाता है। पूरे जिले से मरीज अस्पताल में भर्ती होने आते हैं। इसलिए अस्पताल में वितरण किए जाने वाले भोजन पर मरीज आश्रित रहते हैं। मंगलवार को पूरे दिन मरीज भोजन आने का इंतजार करते रहे। मगर भोजन नहीं आया। कुछ वार्डों में मरीजों ने हंगामा किया। सीएमएस डा. आरके पांडेय अस्पताल में पहुंचे। मरीजों ने बताया कि रात 11 बजे भोजन का वितरण हुआ।
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