हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी सुहागनगरी में पालीथिन के प्रयोग पर रोक नहीं लग सकी है। 31 दिसंबर तक 40 माइक्रोन से कम की पालीथिन बैग पर पूर्णतया प्रतिबंध लगाने के निर्देश जारी किए थे लेकिन नगर निगम प्रशासन ने हाईकोर्ट के आदेश को भी तवज्जो नहीं दी। पूरे शहर में धड़ल्ले से पालीथिन का प्रयोग हो रहा है।
केंद्र सरकार द्वारा पर्यावरण संरक्षण अधिनियम 1986 के प्रावधान के तहत 40 माइक्रोन से कम की पालीथिन बैग पर पूर्णतया प्रतिबंध है। हाईकोर्ट ने 31 दिसंबर तक पूरे प्रदेश में पालीथिन पर रोक लगाने के आदेश जारी किए थे। इसके बाद लखनऊ में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की अध्यक्षता में आयोजित केबिनेट की बैठक में प्रदेश भर में पालीथिन पर बैन लगाने का अहम फैसला लिया गया। यहां तक कि शादी समारोह में प्रयोग होने वाले प्लास्टिक के ग्लास व चम्मच पर भी पाबंदी लगाने की बात कही गई है। यही नहीं पॉलीथिन प्रयोग पर छह महीने की सजा व पांच लाख तक जुर्माने का भी प्रावधान किया गया है। हाईकोर्ट के साथ केंद्र व प्रदेश सरकार जहां पॉलीथिन पर बैन लगाने को गंभीर नजर आ रही हैं, वहीं जिला एवं नगर निगम प्रशासन पालीथिन पर रोक लगाने के प्रति बेपरवाह दिख रहे हैं।
यहां प्रयोग से पूर्णतया बाहर हुई पॉलीथिन
पॉलीथिन के प्रयोग से होने वाले दुष्परिणाम व गंभीर बीमारियों को देखते हुए महाराष्ट्र, मेघालय, चंडीगढ़ व पश्चिम बंगला में 40 माइक्रोन तथा पंजाब व केरल में 30 माइक्रोन से कम मोटाई की पॉलीथिन प्रयोग से पूर्णतया बाहर कर दी गई है।
योजना बनी न चला कोई अभियान
हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी नगर निगम प्रशासन शहर में पालीथिन पर प्रतिबंध नहीं लगा सका। अभियान तो दूर नगर निगम अभी तक कोई योजना तक नहीं बनाई गई। बाजार में धड़ल्ले से पॉलीथिन का प्रयोग हो रहा है।
हाईकोर्ट एवं प्रदेश सरकार के आदेश के अनुपालन में पालीथिन पर सख्ती से रोक लगाने के लिए सोमवार से लगातार अभियान चलाया जाएगा। जिन दुकानों पर निर्धारित माइक्रोन से कम पॉलीथिन की बिक्री की जा रही है, उसे जब्त किया जाएगा।
रविंद्र सिंह, सिटी मजिस्ट्रेट
हाईकोर्ट एवं प्रदेश सरकार के आदेश के अनुपालन में नगर निगम सीमा में पॉलीथिन का प्रयोग रोकने को लगातार अभियान चलाया जा रहा है। दिसंबर माह में करीब 500 दुकानदारों का चालान कराया गया है। शहर में थोक विक्रेताओं से पॉलीथिन जब्त कराने को अभियान चलाया जाएगा।
प्रमोद कुमार, अपर नगर आयुक्त