फिरोजाबाद। आजादी की चिंगारी सिर्फ शहर ही नहीं बल्कि गांव-गांव तक लगी थी। किसानों की टोलियों ने वारफंड नहीं देने का फैसला लिया था। फिरंगियों ने जब वार फंड नहीं देने पर जेल भेजने की धमकी दी तो गांव भीकनपुर मेघपुर के बोहरे लाला राम व श्यामलाल के नेतृत्व में आंदोलनकारी जेल जाने को तैयार हो गए। जब दूसरी जगह के लोगों ने भी इस बात को सुना तो वारफंड का विरोध गांव-गांव में शुरू हो गया।
सुहागनगरी के आजादी के आंदोलन के यदि पन्नें पलटें तो शहर से लेकर गांव तक देश को फिरंगियों से मुक्ति दिलाने की आवाज उठी थी। कोई स्टेशन जलाकर चुनौती दे रहा था तो कोई विदेशी कपड़ों का बहिष्कार कर। आंदोलन की कड़ी में उस समय नया मोड़ आया जब गांव भीकनपुर मेघपुर के स्वतंत्रता आंदोलनकारी बोहरे लालाराम व श्यामलाल के नेतृत्व में वार फंड नहीं देने का फैसला लिया। अंग्रेजी इंस्पेक्टर इमदाद खां ने फोर्स के साथ घरों में लूटपाट करने का आंदोलनकारियों ने विरोध किया। विरोध के चलते इमदाद खां ने 40 आंदोलनकारियों को जेल भेजा था। भीकनपुर मेघपुर निवासी पूर्व प्रधानाचार्य अमरपाल सिंह कहते हैं कि आंदोलनकारी अंग्रेजों के आगे झुके नहीं थे। महिलाओं तक ने अंग्रेजी हुकूमत का विरोध किया था।
यह आंदोलनकारी गए थे जेल
डालचंद्र,जीवाराम, जोरावर सिंह, मवासीलाल, हरदयाल, पोखपाल, अगनलाल, फूल सिंह, घनश्याम, होतीलाल, चिरंजी लाल, रेवतीराम, मटारेलाल, घूरी सिंह, पातीराम, लेखराज, चिरंजीलाल, सांवले, देशराज, नाहर सिंह, रामदयाल, छदामी, गिरवर, पीतांबर, नेत्रपाल, हरीराम, ज्ञानीराम, श्रीलाल, हुब्बलाल, नन्नूराम, लालाराम, जोधीलाल सहित काफी ग्रामीण शामिल थे।
युवाओं ने थामा तिरंगा, निकाला था बड़ा जुलूस
स्वतंत्रता सेनानी लाला गोपीनाथ कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष होने के कारण गिरफ्तार किए गए। बाद में गिरजाशंकर दुबे के नेतृत्व में एक बड़ा जुलूस निकला। जंग ए आजादी का आंदोलन इस तरह भड़का कि विद्यार्थियों ने भी तिरंगा हाथ में लेकर जुलूस निकाला। कई स्थानों पर तोड़फोड़ की। शहर का बड़ा डाकखाना आंदोलनकारियों के निशाने पर रहा। 1942 की अगस्त क्रांति का गवाह बड़ा डाकघर अब उस स्थान पर नहीं रहा है।
आंदोलन में इनका रहा बड़ा योगदान
अगस्त क्रांति आंदोलन में जीवाराम पालीवाल, पन्नालाल सरल, डॉ. प्यारेलाल राठौर, वैद्य बुद्धदेव, भूपसिंह शर्मा, बौहरे ओमप्रकाश, बाबूलाल याज्ञनिक, रतनलाल बंसल, पंडित श्यामलाल वकील, सोमराज पालीवाल, रामगोपाल पालीवाल, गुरुदयाल सिंह, ाधारमण वासलस, केदारनाथ हिंद, कालीचरन जवरेवा, कैलाशचंद्र, गंधर्व सिंह यादव, मेघदत्त शर्मा, राजाबाबूू गुप्ता, ठाकुर मोहन सिंह, रामकिशन गुप्ता, पंडित रामंचद्र पालीवाल, जगदीश प्रसाद झिंदल, कुंदनलाल, घनश्यामदास चतुर्वेदी ने योगदान दिया।