भगवान चंद्रप्रभु का निर्वाणोत्सव धूमधाम से मनाया गया। अतिशय क्षेत्र मंदिर चंद्रप्रभु में सुबह से लेकर रात तक धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों की धूम रही। विधिविधान के साथ निर्वाण लाड़ूू चढ़ाया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पहुंचकर मोक्ष की कामना की।
कार्यक्रम के तहत चंद्रप्रभु मंदिर में सबसे पहले शांतिधारा की गई। इसका सौभाग्य शांतिधारा संयज जैन बल्ले को मिला। वहीं पहला लाड़ूू महेंद्र जैन ने चढ़ाया। इसके बाद श्रद्धालुओं ने भक्तिभाव से पूजा अर्चना की। मंत्रोच्चारण के साथ निर्वाण लाड़ूू चढ़ाया गया। रात्रि में सामूहिक आरती की गई। वहीं निर्भय सागर पाठशाला के बच्चों ने भगवान चंद्रप्रभु पर आधारित लघु नृत्य नाटिका का मंचन किया। अजय जैन, अरुण जैन पीली कोठी, ललितेश जैन, अमित जैन, प्रवीन जैन, सुनील जैन, महावीर प्रसाद जैन, शिवम जैन, ऋषभ जैन, विक्की जैन, राहुल जैन आदि उपस्थित रहे।
गांधी नगर स्थित पार्श्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में सुबह छह बजे चंद्रप्रभु भगवान का जलाभिषेक किया गया। इंद्र-इंद्राणी के स्वरूपों ने संगीतमय सामूहिक पूजन किया। मंत्रोच्चारण के साथ भगवान चंद्रप्रभु को दस किलो का रत्न जड़ित निर्वाण लाड़ूू समर्पित किया गया। रतन जैन ने बताया कि चंद्रप्रभु भगवान सम्मेद शिखर के ललित कूट से मोक्ष को पधारे थे। इस अवसर महावीर प्रसाद जैन बजाज, सुरेश जैन, विकास जैन एडवोकेट, पप्पू जैन, राजेश जैन सरल, मैनासुंदरी जैन, इंद्राणी जैन, मनोरमा जैन, मनोज जैन, मनीष जैन, संगीता जैन, दिनेश जैन, जिनेंद्र जैन आदि उपस्थित रहे।