अपने भक्तों की पुकार पर ही भगवान प्रकट होते हैं। जब भी भगवान को सच्चे हृदय से पुकारा जायेगा, भगवान तुरंत उपस्थित होंगे। मनुष्य को स्मरण रखना चाहिए कि ईश्वर सर्वस्व है। इसलिए हमें अपने दायित्व का निर्वहन पूरी श्रद्धा और ईमानदारी से करना चाहिए। यह उद्गार गांव हुसैनपुर में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा में भागवताचार्य चित्रलेखा ने व्यक्त किये।
भागवताचार्य ने भक्त प्रहलाद की कथा का वर्णन करते हुए कहा कि भक्त प्रहलाद की भक्ति का ही फल था कि प्रभु श्री हरि को हर बार धर्म और सत्य की रक्षा के लिए आना पड़ा। अंत में जब पाप की बहुतायत हो गई तो उस समय श्रीहरि को नरसिंह अवतार धारण करना पड़ा। भागवताचार्य ने कहा कि प्रहलाद ने अपनी भक्ति के बल पर प्रमाणित कर दिया कि कण-कण में ईश्वर विद्यमान है। यही कारण था कि हिरणकश्यप के कहने पर श्री हरि खंभा फाड़कर प्रकट हो गए और उन्होंने पाप रूपी हिरणकश्यप का वध कर पुण्य की स्थापना की। उन्होंने कहा कि आज आवश्यकता है कि भगवान को सच्चे मन से खोजने की। भगवान तो कण-कण में विराजमान हैं। भागवताचार्य ने कहा कि कलियुग में तो ईश्वर का नाम सुनने मात्र से मुक्ति संभव है। अत: हमें ईश्वर का नाम जपने का कोई भी क्षण नहीं गंवाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो आनंद ईश भक्ति में है, वह अन्यत्र कहीं नहीं। भागवत कथा में रुक्मिणि विवाह, श्रीकृष्ण का मथुरा छोड़कर द्वारिकापुरी जाना आदि लीलाओं का जीवंत व्याख्यान किया गया। बुधवार को भागवत कथा के अंतिम दिन सुदामा चरित्र, योगेश्वर का वर्णन, भागवत कथा का निरूपण आदि लीलाओं का वर्णन किया जाएगा।
फोटो-टूंडला के गांव हुसैनपुर में श्रीमद् भागवत कथा सुनाते चित्रलेखा व श्रवण करते श्रद्धालुगण फोटो-2,3