फिरोजाबाद। निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों पर कार्य कर रहे गोसेवकों का मानदेय एवं अन्य व्यवस्थाओं की पूर्ति के लिए आर्थिक तंगी झेल रहीं ग्राम पंचायतों को शासन ने बड़ी राहत दी है। ग्राम पंचायतें ग्राम विकास को मिलनी वाली 14वें वित्त की धनराशि से उक्त कार्यों को पूरा करा सकेंगी। ग्राम पंचायत सशक्तिकरण के लिहाज से शासन ने यह बड़ा कदम उठाया है।
ग्रामीण क्षेत्रों में संचालित निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों पर गोवंश की देखभाल करने वाले गौ सेवकों को अब मासिक मानदेय के लिए अब इधर-उधर नहीं भटकना होगा। ग्राम पंचायतें 14वें वित्त के माध्यम से मिलने वाली धनराशि से उपरोक्त का मानदेय भुगतान कर सकेंगीं। पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव मनोज कुमार द्वारा इस बाबत गत दो जून को जरूरी निर्देश जारी किए हैं। जारी निर्देशों के अनुसार ग्राम पंचायतों द्वारा गौवंश के भरण पोषण हेतु भूसा क्रय एवं उसके परिवहन पर खर्च होने वाले खर्चतों को भी वहन करने का रास्ता साफ हो गया है। हालांकि उपरोक्त नयिम पूर्व में भी पशुपालन विभाग से जारी हुए थे। लेकिन पंचायती राज विभाग की मंजूरी नहीं मिलने के कारण पंचायतें उक्त मद में खर्च होने वाली धनराशि का भुगतान नहीं कर पा रहीं थीं।
इन कार्यों पर खर्च हो सकेंगी
14वें वित्त की धनराशि
1-खेतों में फसल अवशेष यानी पराली से भूसा बनाने पर होने वाले खर्च का भुगतान
2-क्रय किए गए भूसे को निराश्रित गोवंश आश्रय स्थल तक लाने के लिए होने वाले परिवहन का भुगतान
3-भूसा भंडारण हेतु बनाए जाने वाली कूप अथवा बुर्जी निर्माण पर होने वाला खर्च
4- आश्रय स्थल पर कार्यरत गोसेवकों का पारिश्रमिक भुगतान