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गार्ड ऑफ ऑनर देकर किया जांबाज कमांडो का अंतिम संस्कार

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टूंडला के गांव छितरई में अंतिम विदाई देते पुलिसकर्मी - फोटो : TUNDLA
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टूंडला (फिरोजाबाद)। दो दिन की छुट्टी के बाद नौकरी पर जाते हुए सड़क हादसे में हुई मौत के बाद बुधवार सुबह सैनिक वेदप्रकाश का शव गांव छितरई लाया गया। शव के पहुंचते ही गांव में सन्नाटा पसर गया। सैनिक के अंतिम दर्शन को सैकड़ों की संख्या में लोग पहुंच गये। सैनिक को गार्ड ऑफ ऑनर देकर अंतिम संस्कार किया गया। मुखाग्नि बेटे हिमांशु (6) से दिलाई गई।
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थाना पचोखरा क्षेत्र के गांव छितरई निवासी वेदप्रकाश उर्फ गुड्डा (32) पुत्र लक्ष्मण सिंह भारतीय सेना में कमांडो थे। वर्तमान में उनकी तैनाती राजस्थान के जैसलमेर में थी। सोमवार सुबह वह दो दिन की छुट्टी के बाद अपनी कार द्वारा जैसलमेर के लिए जा रहे थे। आगरा से उनके साथ राया, मथुरा निवासी साथी फौजी शिवकुमार भी जैसलमेर के लिए सवार हुआ था। सोमवार रात 12 बजे करीब जिला नागौर के झुझुनूं में उनकी कार दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। हादसे में दोनों की मौके पर ही मौत हो गई थी।
बुधवार सुबह कमांडो वेदप्रकाश का शव पैतृक गांव पहुंचा तो उनकी पत्नी व बच्चे बिलख पड़े। जवान को गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। एसडीएम टूंडला केपी सिंह तोमर, थानाध्यक्ष पचोखरा संजय सिंह समेत अन्य लोगों ने पुष्प अर्पित कर सलामी दी। पूर्व विधायक शिव सिंह चक ने परिजनों को सांत्वना दी। पिता लक्ष्मण सिंह ने बताया कि शिवकुमार की कम उम्र में ही शादी कर दी थी। उसकी शादी भरतपुर राजस्थान के नगला बरताई निवासी अनीता के साथ हुई थी। उसकी शादी वर्ष 2002 में की थी, लेकिन विदाई 2009 में की थी। तब तक उसकी सेना में नौकरी लग चुकी थी। अब उसके दो बच्चे की जिम्मेदारी भी उनके ऊपर आ गई है।
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जांबाज कमांडो था वेदप्रकाश, दक्षिण अफ्रीका में ली थी ट्रेनिंग
कमांडो के शव के साथ आए 12 रेपिड डिव बटालियन जैसलमेर के नायब सूबेदार प्रीतम सिंह ने बताया कि वेदप्रकाश सेना का जांबाज कमांडो था। उसकी योग्यता को देखते हुए ही सरकार ने उसे साउथ अफ्रीका सीक्रेट मिशन पर भेजा था। सैनिक वेदप्रकाश मई 2018 में सेना के सीक्रेट मिशन पर साउथ अफ्रीका गए गए थे। इस मिशन के दौरान उन्हें कमांडो की ट्रेनिंग दी गई थी। जहां से वह दिसंबर 2018 में वापस भारत लौटे थे। सरकार ने करोड़ों रुपये उनकी कमांडो की ट्रेनिंग पर खर्च किए थे।
रिटायमेंट पर बेटे को दिलाई थी कार
हादसे के शिकार हुए कमांडो के पिता लक्ष्मन सिंह ने बताया कि वे रिटायर्ड शिक्षक हैं। जब वह सेवानिवृत्त हुए थे तो बेटे ने यादगार के रूप में उनसे कार की डिमांड की थी। तब उन्होंने बेटे को कार दिलाई थी। उन्होंने भारी मन से कहा कि उन्हें क्या पता था कि बेटे की खुशी के लिए जिस कार को उन्होंने दिलाया है। वहीं उसका काल बन जाएगी। बेटे की मौत के बाद मां ओमवती रोते हुए बार-बार बेसुध हो रही थी।
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