कांच के कारखानों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली नेचुरल गैस की कीमतों में प्रति घनमीटर डेढ़ से दो रुपये की बढ़ोतरी की खबर से उद्यमी परेशान हैं। इस बढ़ोतरी के चलते घरेलू बाजारों से मिले ऑर्डरों को पूरा करने में कांच उद्यमियों को लाखों का नुकसान होने की आशंका है।
ईरान और इस्राइल के बीच हालिया तनाव का असर अब जिले के कांच और हस्तशिल्प उद्योग पर दिखना शुरू हो गया है। कांच कारखानों में ईंधन के रूप में इस्तेमाल होने वाली नेचुरल गैस की कीमतों में प्रति घनमीटर डेढ़ से दो रुपये की बढ़ोतरी होने की खबर से उद्योग जगत सहमा हुआ है। इस बढ़ोतरी के चलते घरेलू बाजारों से मिले ऑर्डरों को पूरा करने में कांच उद्यमियों को लाखों का नुकसान होने की आशंका है।
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अंतरराष्ट्रीय बाजारों में मासिक आधार पर नेचुरल गैस की कीमतों में प्रति थर्मल यूनिट 24 डॉलर की बढ़ोतरी की घोषणा हुई है, जिसका सीधा असर फिरोजाबाद की कांच इकाइयों में खपत होने वाली नेचुरल गैस पर पड़ा है। 1 जुलाई से नेचुरल गैस के बिल 34.50 से 35 प्रति घनमीटर के हिसाब से जारी होंगे।
कांच कारोबारियों के अनुसार, जुलाई से प्रति घनमीटर नेचुरल गैस की कीमतों में इस भारी बढ़ोतरी से न केवल निर्यात होने वाले कांच के सामान, बल्कि घरेलू ऑर्डरों को भी पूरा करना मुश्किल हो जाएगा। वर्तमान में नेचुरल गैस की दर लगभग 33 प्रति घनमीटर है, जो जुलाई में 34.50 से 35 प्रति घनमीटर तक पहुंचने की पुख्ता सूचना है। ऐसे में, पुराने ऑर्डरों को पूरा करने में कांच उद्यमियों और हस्तशिल्पियों को भारी नुकसान होना तय है।