गंगा दशहरा को लेकर पतंगों का बाजार सज गया है।
भले ही अब पतंगबाजी का शौक कम हो चुका है। पर, गंगा दशहरा पर्व को लेकर पतंगों का बाजार एक बार फिर से सज गया है। दुकानें रंग-बिरंगी पतंगों से पटी है। वहीं लोगों ने गंगा दशहरा पर गंगा-यमुना में स्नान की तैयारियां शुरुू कर दी हैं।
गंगा दशहरा पर्व 14 जून को है। घर-घर इसे लेकर तैयारियां शुरू हो गई है। इस पर्व पर गंगा-यमुना में डुबकी लगाकर शिव पूजा का महत्व है। बड़ी संख्या में लोग दर्शन के लिए बटेश्वर जाते हैं। वहीं फीरोजाबाद में तो गंगा दशहरा पर पतंगबाजी का कभी अलग ही नजारा था। दशहरे के दिन चूड़ी के गोदाम हों या फिर दुकानें सभी बंद रहती थीं। बाजारों में सन्नाटा रहता था। छतों पर बच्चे युवा,परिवार के बुजुर्ग तक पतंगबाजी का आनंद लिया करते थे। अब बदलते समय के साथ पतंगबाजी का शौक कम हो चुका है। हालांकि परंपरा का निर्वहन अब भी लोग करते नजर आ जाते हैं। पतंग कारोबारी सुलेमान उस्ताद के पुत्र इमरान ने बताया कि पतंगबाजी का क्रेज आज घट गया है। पहले दशहरा के आने से एक सप्ताह पूर्व ही पतंगों की बिक्री शुरू हो जाती थी। ऐसे में दिन-रात पूरा परिवार पतंग बनाने में ही लगा रहता था। मांझा एवं सद्दा चरखी में भरने को कई मजदूर लगाने पड़ते थे। अब तो सिर्फ दशहरे के दिन या फिर एक दिन पूर्व बिक्री होती है।
मांझा पहले एक हजार गज 50 से 75 रुपया का था। वही मांझा अब सौ से 250 तक पहुंच गया है। पतंगों की कीमतों में भी अंतर आया है। पन्नीवाली पतंग एक रुपया से लेकर 20 रुपया तक की है। वहीं कागज की पतंग अब पहले से काफी महंगी हो गई हैं। पतंग फर्रूखाबाद,आगरा,कानपुर से और मांझा बरेली से लाना पड़ता है।