नववर्ष 2015 के पहले ही दिन गेल गैस लि. ने कांच उद्योग को तगड़ा झटका दिया। अभी तक उद्योग गैस की रेट बढ़ोत्तरी से उभरे नहीं थे, तब तक गेल ने गैस के बिल पर प्रति यूनिट करीब 1.25 रुपये की दर से लोकल डिस्ट्रीब्यूशन चार्जेज वसूलने से संबंधित उद्यमियों को पत्र भेज दिया है।
देश-विदेश में मशहूर सुहागनगरी का कांच उद्योग लगातार संकट के दौर से गुजर रहा है। कभी ओवरप्रोडेक्शन को लेकर, तो कभी बड़ी कंपनियों द्वारा लाबिंग करने को लेकर। नवंबर माह में गैस की रेट बढ़ने से कांच उद्योग में अबतक उथल-पुथल मची हुई।
इस समस्या का तो समाधान नहीं हो सका, तब तक गेल ने नए साल के पहले ही दिन उद्यमियों को बड़ा झटका दे दिया। सुहागनगरी में करीब 195 यूनिट गैस से संचालित हैं, जिसमें प्रतिदिन करीब 10 से 12 घनमीटर गैस प्रयोग होती है। इस लिहाज से देखें तो 1.25 रुपए प्रति यूनिट की दर से कांच उद्योग पर 15 से 18 लाख तक अतिरिक्त बोझ पढ़ना तय माना जा रहा है। इस पत्र के आने के बाद उद्योग जगत टेंशन में आ गया है।
एक-एक कारखानेदार पर महीने में लाखों रुपये को बोझ बढ़ जाएगा। इससे पूर्व भी गेल ने लोकल डिस्ट्रीब्यूशन चार्ज लगाया था। उद्यमियों की पहल पर पेट्रोलियम मंत्रालय से आश्वासन भी मिला था, लेकिन इसके बाद आए पत्र इस पत्र ने उद्यमियों की धड़कन तेज कर दी है। गेल द्वारा लगाए गए लोकल डिस्ट्रीब्यूशन चार्जेज के संबंध में उद्यमी जल्द ही बैठक कर आगामी रणनीति बनाने की तैयारी में जुट गए हैं।
गेल ने एक जनवरी 2015 से लोकल डिस्ट्रीब्यूशन चार्जेज वसूलने को दबाव बनाना शुरू कर दिया है, जबकि यह मामला होईकोर्ट में विचाराधीन है। वर्तमान में कांच उद्योग पहले से ही संकट के दौर से गुजर रहा है। नवंबर से गेल द्वारा गैस की दर 4.2 से बढ़ाकर 5.05 डालर प्रति एमएमवीटीयू कर दी गई हैं, जिसके कारण उत्पादन की लागत काफी बढ़ गई है। विदेशों से आयातित कांच का सामान काफी मात्रा में आ रहा है, जिसके कारण यहां पर उत्पादित कांच के सामन की बिक्री नहीं हो रही है।
राजकुमार मित्तल, अध्यक्ष-यूपीजीएमएस