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हाईटेंशन ने ली पांच की जान

Sun, 22 Mar 2015 11:26 PM IST
ब्यूरो, अमर उजाला फीरोजाबाद
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रविवार दोपहर शिकोहाबाद के गांव सैजलपुर में सबमर्सिबल पंप की बोरिंग पर काम करते करंट लगने से तीन मजदूरों की मौत हो गई। एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया।
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शिकोहाबाद के गांव सैजलपुर निवासी छविराम घर के बाहर सबमर्सिबल पंप लगवा रहे थे। इसे लगाने का कार्य मटसेना के गांव बजीरपुर जेहलपुर निवासी दिनेश (25) पुत्र हुंडीलाल, भूपाल सिंह (30) पुत्र चौब सिंह व टिंकू (20) पुत्र बसंत राजपूत, गोलू पुत्र रामपाल रहे थे। रविवार को सभी लोग सबमर्सिबल में लोहे का पाइप डाल रहे थे तभी ऊपर से गुजर रही हाईटेंशन लाइन से पाइप छुल गया और सभी को करंट का जोरदार झटका लगा। दिनेश, भूपाल, टिंकू और गोलू बुरी तरह से झुलस गए।  हादसे की जानकारी होेते ही ग्रामीणों ने शोरगुल करते हुए विभाग को फोन करके बिजली आपूर्ति को बंद कराया। दिनेश, भूपाल सिंह और टिंकू की मौके पर ही मौत हो गई। जबकि गंभीर रुप से घायल हुए गोलू को जिला अस्पताल लाया गया। वहां से उसे आगरा रेफर कर दिया। सीओ शिकोहाबाद श्यामकांत थानाध्यक्ष शिकोहाबाद के साथ मौके पर पहुंचे।
बजीरपुर जेहलपुर में मातमी सन्नाटा
तीन मौतों के बाद परिवारीजनों में कोहराम मचा
अमर उजाला ब्यूरो
फीरोजाबाद। शिकोहाबाद के गांव सैजलपुर में हुए दर्दनाक हादसे में जान गंवाने वाले तीनों लोग मटसेना के गांव बजीरपुर जेहलपुर के रहने वाले थे। दोपहर करीब चार बजे उनकी मौत की खबर गांव में पहुंची तो परिवारीजनों में कोहराम मच गया। काफी संख्या में ग्रामीण जमा हो गए।
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ग्रामीणों के आक्रोश को देखते हुए अस्पताल को छावनी बना दिया गया था। सीओ सिटी राजेश चौधरी, सीओ सदर जगदीश सिंह और सीओ शिकोहाबाद श्यामकांत, कोतवाल दक्षिण, उत्तर, लाइनपार के साथ थानाध्यक्ष रामगढ़ और रसूलपुर पुलिस तथा पीएसी के साथ जिला अस्पताल आ गए। भाजपा नेता व पूर्व जिलाध्यक्ष डा. लक्ष्मी नारायन यादव के साथ तहसीलदार जीत सिंह राय भी टीम के साथ अस्पताल पहुंचे। पूछताछ करने के साथ ही पीड़ित परिवारीजनों को सांत्वना देने का प्रयास किया। वहीं टिंकू की मौत की खबर सुनकर अस्पताल पहुंचे उसकी मां गश खाकर जमीन पर गिर पड़ी। जबकि पिता और मृतकों के भाईयों को रो-रोकर बुरा हाल था।

दर्दनाक हादसे के बाद भी नहीं जागी मानवता
धरती के भगवान कहे जाने वाले चिकित्सकों की इस दर्दनाक हादसे के बाद भी मानवता नहीं जागी। घायल अवस्था में उपचार के लिए जिला अस्पताल लाए गए गोलू को आगरा ले जाने की सलाह तो दी गई, लेकिन सरकारी एंबुलेंस मौजूद होने के बाद भी उसको उपलब्ध नहीं कराई गई। इसलिए करीब पौन घंटे तक अस्पताल में जीवन और मौत के बीच संघर्ष करता रहा। कोतवाल उत्तर ने प्राइवेट एंबुलेंस कराकर उसको आनन फानन में उपचार के लिए आगरा भेजा। सीएमएस अजय शुक्ला का कहना है कि परिजनों ने चिकित्सक से एंबुलेंस के लिए नहीं कहा था न ही उन्हें बताया गया। उन्हें बताया जाता तो एंबुलेंस की व्यवस्था की जाती।

एक माह में खो दिए दो बेटे
दिनेश की मौत के बाद पिता हुंडीलाल का रो-रोकर बुरा हाल था। क्याेंकि दिनेश की मौत के बाद जो सदमा उनको लगा, शायद वह जिदंगी भर नहीं भुला सकते। एक माह पूर्व दिनेश के बड़े भाई मनोज ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली थी। इसके साथ ही परिवार के भरण पोषण की जिम्मेदारी दिनेश के साथ उसके भाई सुरेश के कंधों पर थी।

मृतकों के परिवार की अच्छी नहीं है आर्थिक स्थिति
भूपाल और टिंकू के परिवार की स्थिति भी काफी अच्छी नहीं है। टिंकू दो भाई होने के साथ ही भूपाल चार भाई हैं। इसमें केवल भूपाल की ही शादी हुई थी और उसके एक बच्चा भी तीन वर्ष का है।

हाईटेंशन लाइन से टकराई श्रद्धालुओं की बस, दो की मौत
नारखी थाना क्षेत्र के बड़ा गांव निवासी श्रद्धालुओं की बस दाऊजी में हाइटेंशन लाइन से टकरा गई। हादसे में दो श्रद्धालुओं की मौत हो गई। इससे परिवारीजनों में कोहराम मच गया। शवों को जिला अस्पताल लाया गया। वहां पोस्टमार्टम कराने के बाद उन्हें परिवारीजनों को सौंप दिया।
नारखी थाना क्षेत्र के बड़ा गांव निवासी विद्याराम कुशवाहा (35) पुत्र मोहनलाल कुशवाहा किराए पर बस कर के बेलन चौढ़रे देवी के दर्शन करने गए थे। उनके साथ गांव का रामू प्रजापति (30) पुत्र रामकिशन भी परिवार के साथ गया था। सभी लोग देवी के दर्शन कर शनिवार शाम को मथुरा स्थित दाऊजी मंदिर पहुंचे। वहां पर दर्शन कर सभी लोग गांव लौटने के लिए बस में सवार हो रहे थे, तभी बस पीछे की तरफ जाने लगी। रामू ने पिछले पहिये के नीचे ईंट लगाने का प्रयास किया तब तक बस हाईटेंशन लाइन से टकरा गई और उसमें करंट आ गया। रामू को भी जोरदार झटका लगा उसे बचाने के लिए विद्याराम ने प्रयास किया तो वह भी करंट की चपेट में आ गया। दोनों की मौके पर ही मौत हो गई। श्रद्धालुओं में कोहराम मच गया। दोनों के शवों को पहले गांव फिर जिला अस्पताल ले जाया गया। पुलिस ने पीएम कराने के बाद शवों को परिवारीजनों को सौंप दिया।

सात बच्चों के सिर से उठा पिता का साया
हादसे में रामू और विद्याराम की मौत के बाद सात बच्चों के सिर से पिता का साया उठ गया। रामू के चार बच्चों में दो बेटी और दो बेटे हैं। जबकि विद्याराम के तीन बच्चे है। दोनों लोग मजदूरी करके परिवार का भरण पोषण करते थे।
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