टूंडला। हथिनी कुंड बैराज से लगातार छोड़े जा रहे पानी और भारी बारिश से यमुना अपना रौद्र रूप दिखाने लगी है। यमुना के तेज बहाव में खादरों की जमीन कटकर यमुना में समा रही है। ग्रामीण बोरियों में मिट्टी भरकर कटान रोकने का प्रयास कर रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि दिल्ली मथुरा के हालातों से प्रतीत हो रहा है कि अगले दो तीन दिनों में यहां के हालात भी वहीं जैसे होंगे। ग्रामीणों ने सुरक्षित स्थान पर घरेलू सामान पहुंचाना शुरू कर दिया है।
यमुना तटवर्ती गांव नगला केसों, अनवारा, रसूलाबाद, रामगढ़ के किसान अरविंद कुमार, साहब सिंह, सोनपाल, भजनलाल आदि ने बताया कि यमुना के उफान से उनकी खादर की सैकड़ों बीघा, बाजरा, मक्का, तिलहन,ज्वार व सब्जियों की फसल नष्ट हो गई हैं। रसूलाबाद निवासी किसान दयाराम, पूरन सिंह, मुरारीलाल, जागन सिंह व देवकरन सिंह का आरोप है कि क्षेत्रीय लेखपाल शैलेंद्र प्रताप सिंह सूचना देने के बाद भी क्षेत्र में नहीं आए हैं, उन्होंने बताया कि वर्ष 2023 में भी इसी तरह खादर की फसलें डूब गई थीं, लेकिन किसी किसानों को मुआवजा नहीं मिला था।
डरे-सहमे किसान रातभर यमुना के बढ़ते जलस्तर पर नजर रखे रहे हैं। बढ़ते जलस्तर से खादर की खेती में तेजी से कटान हो रहा है। किसान दिनभर मेढबंदी कर पानी रोकने का प्रयास करते रहे, किंतु प्रयास के बावजूद खादर की बची फसलों में पानी ही प्रवेश नहीं कर रहा उपजाई मिट्टी यमुना में समाती जा रही है। किसान रोमन सिंह, थान सिंह, कालीचरन, काशीराम, जनक सिंह, मुरारीलाल, ओम प्रकाश ने प्रशासन से बढ़ते जलस्तर पर निगरानी की मांग की है।
यमुना बाढ़ से ये गांव होंगे प्रभावित
टूंडला। जिस रफ्तार से यमुना जल स्तर बढ़ रहा है। दिल्ली व मथुरा में बाढ़ से लोग जूझ रहे है। इसको देखते हुए तटवती गांव तक पानी पहुंचने की संभावना व्यक्त की जा रही है। बाढ़ में नगला केशों, रुधऊ मुस्तकिल, अनवारा, जटपुरा, बालमपुर, रसूलाबाद, ग़दलपुरा, रामगढ़, बजहेरा, नगला काले, कुतुकपुर साहब, ठार डेका, ठार वर, ठार हरवंस, नगला राजपति, ग्वारई, घुरुकूआ, नगला नंदा, नगला मूसटा, नियामतपुर आदि गांव प्रभावित होंगे हैं।