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Firozabad News: मेडल से आगे बढ़कर अब सुरक्षा का हथियार बन रही ताइक्वांडो

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फोटो 25 आत्मरक्षा के गुर सीखतीं छात्राएं। संवाद
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फिरोजाबाद। कभी ताइक्वांडो का मतलब बेटियों के लिए सिर्फ मेडल जीतना और प्रतियोगिताओं में नाम कमाना हुआ करता था, लेकिन अब सोच बदल रही है। बेटियां ताइक्वांडो को खेल के साथ-साथ अपनी सुरक्षा का हथियार भी बना रही हैं। सबसे खास बात यह है कि बेटों से ज्यादा बेटियां प्रशिक्षण ले रही हैं। प्राइवेट और निजी स्कूलों में भी आत्मरक्षा के गुर सिखाने पर जोर दिया जा रहा है।
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छात्राओं का कहना है कि सड़क हो या स्कूल-कॉलेज से लौटने का रास्ता, आत्मरक्षा के गुर उन्हें डरने के बजाय परिस्थितियों का सामना करने का हौसला देते हैं। ताइक्वांडो प्रशिक्षण में छात्राओं को केवल किक और पंच ही नहीं सिखाए जाते, बल्कि खतरे को पहचानना, विपरीत परिस्थिति में खुद को बचाना और जरूरत पड़ने पर सामने वाले से दूरी बनाकर सुरक्षित निकलना भी सिखाया जाता है। यही वजह है कि अभिभावक भी अब बेटियों को ताइक्वांडो सिखाने के लिए आगे आ रहे हैं।

अब अकेले डर नहीं लगता
पहले ताइक्वांडो को सिर्फ एक खेल समझती थी। प्रशिक्षण शुरू करने के बाद समझ आया कि यह हमारी सुरक्षा के लिए भी बहुत जरूरी है। अब किसी अनजान परिस्थिति में घबराने के बजाय खुद को संभालने का आत्मविश्वास है। मेरा लक्ष्य प्रतियोगिता में मेडल जीतना तो है ही, साथ ही अपनी सुरक्षा के लिए सीखी तकनीकों को हमेशा याद रखना भी है। —जानवी कुलश्रेष्ठ, छात्रा
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आत्मविश्वास जग रहा
ताइक्वांडो सीखने के बाद मेरे अंदर काफी बदलाव आया है। पहले छोटी-सी बात पर भी डर लगता था, लेकिन अब आत्मविश्वास बढ़ा है। प्रशिक्षण के दौरान हमें बताया जाता है कि खतरे से बचना सबसे पहली प्राथमिकता है और जरूरत पड़ने पर खुद को कैसे सुरक्षित रखना है। —वशिंका, छात्रा

मेडल से पहले आत्मविश्वास जरूरी :
ताइक्वांडो को केवल प्रतियोगिता और मेडल तक सीमित नहीं रखना चाहिए। खासकर बेटियों के लिए यह आत्मरक्षा और आत्मविश्वास का माध्यम है। हमारा उद्देश्य है कि हर बेटी खुद को सक्षम और सुरक्षित महसूस करे। अभिभावक जागरुक हुए हैं। भावुक यादव, प्रशिक्षक

हर स्कूल में आत्मरक्षा का प्रशिक्षण होना चाहिए
यदि स्कूल स्तर से ही छात्राओं को नियमित आत्मरक्षा प्रशिक्षण दिया जाए तो वे छोटी-बड़ी आपात परिस्थितियों में ज्यादा जागरूक और तैयार रह सकती हैं। आज के समय में अभिभावक काफी जागरुक हुए हैं। बेटों से ज्यादा बेटियां आत्मरक्षा का प्रशिक्षण ले रही हैं। जयप्रकाश राजपूत, प्रशिक्षक
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