फिरोजाबाद। मेडिकल कॉलेज में कई विभागों के आधुनिकीकरण के बीच क्षय रोग (टीबी) विभाग की स्थिति चिंताजनक है। 67 साल पुरानी और जर्जर इमारत में चल रहे इस अस्पताल में छत टपकने और दीवारों से नमी रिसने से मरीजों और स्टाफ दोनों की गंभीर खतरा है।
विभाग का सैंपल जांच कक्ष सबसे ज्यादा प्रभावित है जहां बारिश का पानी संवेदनशील उपकरणों के ठीक बगल से रिस रहा है। इसी तरह, दवा स्टोर रूम की छत भी टपक रही है जिससे कीमती दवाएं खराब होने का खतरा मंडरा रहा है। इससे निपटने के लिए स्टाफ के पास सिर्फ एक ही अस्थायी उपाय है दवाओं को पॉलीथीन से ढककर बचाना।
एक कमरे में चल रहे छह पटल
विभाग के कर्मचारी डर के साये में काम करने को मजबूर हैं। हादसे के डर से सभी छह पटलों को एक ही कमरे में सटा-सटाकर चलाया जा रहा है, क्योंकि अन्य कमरों की हालत और भी बदतर है।
मरीजों के लिए बढ़ जाता है इंफेक्शन का खतरा
चिकित्सा विशेषज्ञों के मुताबिक, टीबी जैसी संक्रामक बीमारी के इलाज और जांच के लिए सूखा और स्वच्छ वातावरण अत्यंत जरूरी है। नमी और सीलन न सिर्फ जांच के नतीजों की सटीकता को प्रभावित कर सकती है बल्कि इससे मरीजों में दूसरे इंफेक्शन का खतरा भी कई गुना बढ़ जाता है।
वर्जन
इस इमारत को पहले ही कंडम (अनुपयोगी) घोषित किया जा चुका है। फिलहाल नई बिल्डिंग पर काम चल रहा है। जैसे ही यह तैयार होगी, पूरा विभाग तुरंत वहां शिफ्ट कर दिया जाएगा।-
-डा. सौरभ कुमार, विभागाध्यक्ष, क्षय रोग विभाग