फिरोजाबाद। किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए स्थापित हुआ उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक खुद वित्तीय संकट के दलदल में फंस गया है। सुहागनगर स्थित मुख्य शाखा से कर्ज लेकर किसान अब उसे चुकाना भूल गए हैं। हालात इतने बदतर हैं कि बैंक का करोड़ों रुपया डूबने की कगार पर है और बड़ी संख्या में किसानों के खाते एनपीए घोषित कर दिए गए हैं।
उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक की सुहागनगर शाखा की स्थापना 1 मई 1965 को हुई थी। तब से लेकर अब तक इस बैंक ने किसानों को संबल प्रदान करते हुए 60 करोड़, 83 लाख, 22 हजार रुपये का ऋण वितरित किया है। लेकिन वर्तमान में बैंक की स्थिति चिंताजनक है। बैंक के आंकड़ों के मुताबिक, 1433 किसानों पर बैंक का कुल 9 करोड़, 39 लाख, 95 हजार रुपये बकाया है।
एनपीए की मार और किसानों की बेरुखी
बैंक के लिए सबसे बड़ी मुसीबत वे 1388 किसान हैं जिनके खाते एनपीए घोषित हो चुके हैं। इन डिफाल्टर किसानों पर अकेले 8 करोड़, 78 लाख, 82 हजार रुपये की भारी-भरकम राशि बकाया है। हैरानी की बात यह है कि किसान अपनी गिरवी रखी जमीन को छुड़वाने में भी कोई रुचि नहीं दिखा रहे हैं। ऐसा लगता है मानो उन्हें अपनी संपत्तियों की कोई परवाह ही नहीं है।
कुर्की की कार्रवाई
बैंक प्रशासन ने अब बकाया वसूली के लिए कड़ा रुख अपनाना शुरू कर दिया है। बार-बार नोटिस दिए जाने के बावजूद जब किसानों ने ऋण जमा नहीं किया, तो बैंक ने कई गिरवी रखी संपत्तियों को कुर्क कर दिया है। बैंक अधिकारियों का कहना है कि यदि किसान जल्द ही समझौता योजना के तहत बकाया जमा नहीं करते हैं, तो कुर्क की गई संपत्तियों की नीलामी की प्रक्रिया तेज की जाएगी।
एक नजर में बैंक की स्थिति:
स्थापना: 1 मई 1965
कुल वितरित ऋण: 60,83,22,000
कुल बकाया राशि: 9,39,95,000 (1433 किसानों पर)
एनपीए खाते: 1388 (बकाया 8,78,82,000)
प्रबंधक का पक्ष:
बैंक प्रबंधन के अनुसार, किसानों को कई बार आसान किस्तों और ब्याज छूट योजनाओं की जानकारी दी गई, लेकिन जमा करने की रफ्तार धीमी है। बैंक अब बड़े बकायेदारों के खिलाफ कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी में है।
- जितेंद्र कुमार शर्मा, शाखा प्रबंधक