खेड़ा सिकेहरा में यमुना में डूबी बाजरा की फसल। संवाद
फिरोजाबाद। यमुना का जलस्तर रविवार को खतरे के निशान से ऊपर निकल गया। खतरे का निशान 152.13 मीटर पर था। जबकि सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम की रिपोर्ट के मुताबिक सुबह आठ बजे यमुना का जलस्तर 152.27 सेंटीमीटर पर पहुंच गया था। करीब 27 सेंटीमीटर से अधिक जलस्तर बढ़ने के साथ नए इलाकों में पानी प्रवेश कर गया। पसीना वाले हनुमान मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भी पानी भर गया। मटसेना क्षेत्र के साथ-साथ यमुना की तलहटी वाले गांवों में पानी बढ़ने के साथ फसलें डूबना प्रारंभ हो गई हैंं। मथुरा, गोकुल बैराज से शाम को 1.56 लाख क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। किसान किसी तरह से फसलों को बचाने में जुटे हैं।
यमुना का जलस्तर लगातार बढ़ता जा रहा है। जलस्तर बढ़ने के साथ यमुना का रौद्ररूप बढ़ रहा है। किनारों की फसलें डूबती जा रहीं है। उस्मानपुर के किसानों की मानें तो रात्रि में जागकर यमुना नदी की निगरानी करने को मजबूर हैं। खासतौर से माली पट्टी उस्मानपुर के साथ कारे पिल्लू, नयाबांस, शंकरपुर, सोफीपुर और चंद्रवार ग्राम पंचायत के शामिल मजरों की हालत खराब है। तलहटी के इलाकों की फसल डूब रही है। खेड़ा सिकेहरा ग्राम पंचायत में यमुना का पानी पहुंचने के साथ बाजरा सहित अन्य फसलों में पानी प्रवेश कर गया। इसके कारण गांव के निवासी चंद्रप्रकाश, दिलीप, राजपति और ओमवीर सहित काफी किसानों की फसलें पानी में डूब गई।
बाढ़ चौकियां की सक्रिय, एसडीएम कर रहे हैं निगरानी
फिरोजाबाद। एडीएम विशुराजा ने बताया कि यमुना में जलस्तर बढ़ने के साथ खतरे के निशान से कुछ ऊपर पानी बढ़ा है। टूंडला क्षेत्र में आठ बाढ़ चौकियों को सक्रिय कर दिया है। एसडीएम और लेखपाल की ओर से गांवों में भ्रमण करके जानकारी कर रहे हैं। अभी किसी गांव में पानी घुसनेे की सूचना नहीं मिली है। अभी तक जो रिपोर्ट मिली है वह यमुना की तलहटी में पानी भरा है। किसी किसान की निजी भूमि पर फसल खराब नहीं हुई है। फिर भी यदि किसी किसान की फसलें बर्बाद हुई हैं तो उनका आंकलन कराके नुकसान की भरपाई किए जाने की कार्रवाई की जाएगी। हम आगरा के निरंतर संपर्क में बने हुए हैं।
ओखला से शाम को घटा जलस्तर, एक दो दिन में राहत की उम्मीद
फिरोजाबाद। सिंचाई विभाग के कंट्रोल रूम से मिली रिपोर्ट के मुताबिक रविवार की शाम को ओखला बैराज से पानी छोड़े जाने की मात्रा में काफी कमी आई है। रविवार की शाम को एक लाख छह हजार 817 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। जबकि मथुरा-गोकुल बैराज से एक लाख 56,533 क्यूसेक पानी छोड़ा है। उम्मीद है कि पानी घटने के साथ यदि बारिश नहीं हुई तो एक दो दिन में राहत मिल जाएगी। फिलहाल तो किसान पानी कम होने के लिए दुआ कर रहे हैं।