फिरोजाबाद। लगभग 24 साल पुराने डूडा बीमा के नाम पर कथित धोखाधड़ी के एक मामले में एडीजे कोर्ट ने बृहस्पतिवार को निचली अदालत के आदेश को निरस्त करते हुए दो आरोपियों को बरी कर दिया है।
मामला वर्ष 2002 का है। थाना उत्तर क्षेत्र के तिलक नगर निवासी कनक कुलश्रेष्ठ (अस्पताल में कार्यरत स्टाफ नर्स) ने शिकायत दर्ज कराई थी कि वर्ष 2002 में आरोपी विजय लक्ष्मी निवासी नगला मिर्जा छोटा, थाना रामगढ़ और बनवारी लाल निवासी भोजपुरा, स्टेशन रोड, थाना दक्षिण ने उनसे व उनकी साथी नर्स रीना और पुष्पा से दुर्घटना बीमा कराने के नाम पर 200-200 रुपये और फोटो लिए थे।
आरोप था कि 200 रुपये लेने के बावजूद उन्हें जिला नगरीय विकास अधिकरण (डूडा) की केवल 25-25 रुपये की रसीद दी गई जिससे उनके साथ छल और धोखाधड़ी हुई। मामले की सुनवाई के बाद न्यायिक मजिस्ट्रेट कोर्ट ने 25 अप्रैल 2023 को दिए फैसले में धोखाधड़ी के आरोप में दोषी पाते हुए बनवारी लाल और विजय लक्ष्मी को 3 वर्ष के कारावास व 10-10 हजार रुपये अर्थदंड की सजा सुनाई थी। इस आदेश के खिलाफ अभियुक्तों ने सत्र न्यायालय में अपील दायर की थी। अपीलीय न्यायालय ने पत्रावली और साक्ष्यों का अवलोकन किया तो पाया कि गवाहों के बयानों में विरोधाभास था। कोर्ट में आरोपों का समर्थन ही नहीं किया और पैसों के हेरफेर या धोखाधड़ी से इनकार किया था।
बचाव पक्ष की ओर से पेश गवाह ने स्पष्ट किया कि डूडा विभाग द्वारा असंगठित श्रमिकों के लिए 25 रुपये में 25 हजार रुपये के बीमा की अधिकृत सरकारी योजना चलाई जा रही थी, जिसकी नियमानुसार रसीद काटी गई थी। इस पर अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष यह साबित करने में पूरी तरह विफल रहा कि 25 रुपये के स्थान पर 200 रुपये लिए गए थे। न्यायालय ने निचली अदालत के 25 अप्रैल 2023 के दोषसिद्धि के आदेश को विधि और साक्ष्यों के विपरीत मानते हुए निरस्त कर दिया और बनवारी लाल व विजय लक्ष्मी को सभी आरोपों से दोषमुक्त करने का आदेश जारी किया।