फिरोजाबाद के भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डॉ. लक्ष्मीनरायन यादव के भाई सुमन प्रकाश यादव की हत्या के मामले में नामजद अशोक दीक्षित को सुप्रीमकोर्ट से जमानत मिल गई। कागजी कार्रवाई पूरी होने के साथ उनके बरेली जेल से बाहर आ जाएंगे। वह पिछले 16 वर्ष से जेल में बंद थे। क्योंकि जुलाई 2015 में अपर जिला जज पंचम ने अशोक दीक्षित सहित एक दर्जन लोगों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। इस दौरान उनको कई जेलों में बदल-बदलकर रखा गया था।
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. लक्ष्मीनरायन यादव के भाई एवं तिलक इंटर कालेज के शिक्षक सुमन प्रकाश यादव की 12 अक्तूबर 2007 को सुबह साढ़े आठ बजे सुहागनगर चौराहे के पास गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में अशोक दीक्षित,उनके भाई पप्पू दीक्षित, संजय दीक्षित, सुरेंद्र गुर्जर और वीरभान सिंह गुर्जर को नामजद करने के साथ ही अन्य नाम प्रकाश में आए थे। इस मामले में जुलाई 2015 में अपर जिला जज पंचम रामपाल सिंह ने अशोक दीक्षित सहित 12 को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
इस मामले को लेकर दोनों पक्ष हाईकोर्ट में जाने के साथ ही सुप्रीम कोर्ट तक गए थे। प्रभावी पैरवी के चलते वह पिछले 16 वर्षों से जेल में बंद थे। इस दौरान वह फिरोजाबाद जेल में रहने के साथ-साथ झांसी जेल के साथ अन्य जेलों में रहे। वर्तमान में वह बरेली जेल में बंद है। अशोक दीक्षित के परिजन की ओर से सुप्रीमकोर्ट में लगाई गई जमानत अर्जी पर सुनवाई में आखिर उनको जमानत मिल गई।
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भाई के दोषियों को सजा दिलाने को मेरा प्रयास जारी रहेगा: लक्ष्मीनरायन
भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष एवं वर्तमान में फिरोजाबाद के ब्लाक प्रमुख डा,लक्ष्मीनरायन यादव ने कहा कि मेरे भाई की हत्या में शामिल अशोक दीक्षित को सुप्रीमकोर्ट से जमानत मिलने की जानकारी मिली है। दोषियों को सजा दिलाने के लिए मेरा प्रयास निरंतर जारी रहेगा। इस मामले में हाईकोर्ट के साथ-साथ सुप्रीमकोर्ट में प्रभावी पैरवी जारी रहेगी। वह थाना दक्षिण का 27 डी गैंग लीडर होने के साथ-साथ आगरा के शमशाबाद थाने का हिस्ट्रीशीटर है।