नकली दूध विक्रेताओं के खिलाफ रिपोर्ट तैयार करते सहायक आयुक्त चंदन पांडेय। संवाद।
फिरोजाबाद। पिछले बुधवार को नगला खरगा गांव में पकड़े गए नकली दूध के सभी सात नमूने जांच में अखाद्य घोषित कर दिए गए हैं। रिपोर्ट से पुष्टि हुई है कि इन नमूनों में रिफाइंड तेल, डिटर्जेंट, वैक्स और कार्बोनेट जैसे घातक रसायन मिलाए गए थे, जो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद खतरनाक हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, यह मिलावटी दूध जानलेवा साबित हो सकता है।
खाद्य विभाग के सहायक आयुक्त चंदन पांडेय के नेतृत्व में पिछले बुधवार को सुबह 4 बजे अजय और विजय नामक सगे भाइयों के घर पर छापा मारा गया था। दोनों को मौके पर ही नकली दूध बनाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। इस छापेमारी के दौरान लिए गए सात खाद्य उत्पादों के नमूनों की जांच अब पूरी हो चुकी है।
आरोपी अभी भी फरार, रिपोर्ट बदलवाने की भी हुई थी कोशिश
दूध के नाम पर ज़हर बेचने वाले अजय और विजय कार्रवाई के दौरान पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए थे और अभी तक गिरफ्तार नहीं हुए हैं। उनकी गिरफ्तारी न होने से जहरीले दूध की सप्लाई चेन का खुलासा बाधित हो रहा है।
विभाग के अनुसार, दोनों मिलावटखोरों ने खाद्य विभाग की प्रयोगशालाओं में अपने पक्ष में रिपोर्ट बदलवाने का प्रयास भी किया था, लेकिन अधिकारियों की सख्ती के चलते वे सफल नहीं हो सके। जिलाधिकारी रमेश रंजन ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अपने विशेषाधिकार का प्रयोग कर प्रयोगशाला जांच में तेज़ी लाने का आदेश दिया था। आगरा मंडल के सहायक आयुक्त (खाद्य) सैयद शाहनवाज़ हैदर आबिदी की देखरेख में हुई जांच में सभी नमूने बेहद खतरनाक पाए गए।
रिपोर्ट मिलने के बाद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। यदि यह मुकदमा खाद्य सुरक्षा अधिनियम की धारा 59(2) या 59(3) के तहत दर्ज होता है, तो दोषियों को आजीवन कारावास तक की सजा हो सकती है।
चंदन पांडेय, सहायक आयुक्त (खाद्य)