जिला प्रशासन की सख्ती के बाद बुधवार को कारखानों में पुन: भट्ठियां धधक उठीं। हालांकि सप्ताह में दो दिन बंदी का फरमान से श्रमिकों में असंतोष भड़क गया था लेकिन डीएम, एएलसी के सख्त रुख के चलते गतिरोध दूर हो सका। प्रशासन के हंटर से उद्यमी के हलक सूख गए। इस कारण बुधवार को कारखानों में बदस्तूर काम शुरू हो सका।
कारखानों में ओवर प्रोडेक्शन के कारण उद्यमियों ने सप्ताह में पांच दिन काम कराने का निर्णय लिया था। इस निर्णय से श्रमिकों में आक्रोश भड़क गया। इस कारण दो दिन से शहर में अराजतकता का माहौल था। आक्रोशित श्रमिकों ने हंगामा, पथराव कर लगातार दो दिनों से कारखानों में काम बंद करा दिया। विरोध स्वरूप श्रमिकों ने जाटवपुरी चौराहा पर जाम भी लगाया था। कारखानों में कामकाज ठप होने से उद्यमियों पर दोहरी मार पड़ रही थी। एक ओर जहां हर रोज लाखों की गैस फुंक रही थी तो दूसरी ओर उत्पादन पूरी तरह ठप हो गया था। शहर में अराजकता का माहौल उत्पन्न होने के बाद सहायक श्रमायुक्त ने उद्यमियों को बुलाकर स्पष्ट निर्देश दिए कि पूर्व की तरह सप्ताह में छह दिन कार्य चलेगा। इसके बाद मंगलवार को श्रमिक नेता की गिरफ्तारी की अफवाह ने पुन: शहर का माहौल खराब कर दिया। आक्रोशित श्रमिकों ने जबरन कारखाने बंद कराए। श्रमिकों के आंदोलन के चलते पुलिस प्रशासन भी सक्रिय रहा। श्रमिक नेता भी श्रमिकों को किसी बहकावे में न आकर कार्य पर जाने को प्रेरित करने को सक्रिय हुए। वहीं दूसरी ओर दो दर्जन उद्यमियों का प्रतिनिधि मंडल ने डीएम से मुलाकात की। उद्यमियों ने उद्योगों को चलाने के लिए सुरक्षा मुहैया कराने की मांग की। डीएम ने उद्यमियों को पूर्ण आश्वासन दिया कि उद्यमियों को किसी तरह की परेशानी नहीं होने दी जाएगी। वहीं उद्यमियों ने भी छह दिन काम चलाने एवं आठ घंटे से ज्यादा काम न कराने का आश्वासन दिया। पुलिस की सक्रियता एवं सुरक्षा व्यवस्था देख श्रमिक बुधवार को स्वत: ही घर कारखानों में काम पर पहुंचे।
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पुलिस के साये में शुरू हुआ काम
सीओ सिटी राजेश चौधरी के निर्देशन में बुधवार प्रात: से ही पुलिस टीमें राजा का ताल, नगला भाऊ, इंडस्ट्रियल एस्टेट, स्टेशन रोड, नई बस्ती, जाटवपुरी, रसूलपुर क्षेत्र में गश्त करती रहीं। पुलिस टीमों की सक्रियता के चलते कोई असाजाजिक तत्व कारखानों के आसपास नहीं फटका। बुधवार को कारखानों में कामकाज शुय होने से उद्यमियों ने राहत की सांस ली।
वार्ता में 22 रुपये मजदूरी बढ़ाने पर बनी सहमति
सहायक श्रमायुक्त राजेश मिश्रा, सेवायोजक एवं कांच उद्योग क्रांतिकारी मजदूर संघ के पदाधिकारियों के बीच हुई त्रिपक्षीय वार्ता में टैंक फर्नेस कारखाने के श्रमिकों का 22 रुपये मेहनताना बढ़ाने पर सहमति हुई है। यह बढ़ोत्तरी सभी श्रेणी के श्रमिकों पर लागू होगी। श्रमिक संगठन के पदाधिकारी 50 रुपये बढ़ाने की मांग कर रहे थे। एएलसी ने कहा कि प्रोवीडेंट फंड, ईएसआई से संबंधित कोई परेशानी होने पर कारखानेवार श्रमिकों की सूची के साथ उपस्थित होंगे। इस पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। वार्ता में अरुण कुमार जैन, मुन्ना जैन, सुनील टंडन, भूरी सिंह यादव, नवल सिंह एडवोकेट, मनीष बाबू, मनोज जैन उपस्थित थे।