फिजिशियन डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि बुखार आने से मरीजों के लिवर और आंतों पर असर पड़ रहा है। व्यस्क लोगों के दोनों ही ऑर्गन में सूजन दिख रही है। बच्चों में भी इस तरह की समस्या आ रही है। ऐसे मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। डेंगू और मलेरिया के लक्षण जरूर मिल रहे हैं, लेकिन इस तरह के मरीज अभी कम हैं।
जलेसर रोड निवासी सतेंद्र कुमार ने बताया कि एक सप्ताह तक तेज बुखार रहा। इस दौरान रिपोर्ट में प्लेटलेट्स भी 60 हजार तक ही रह गई। बालरोग विशेषज्ञ डाॅ. एलके गुप्ता ने बताया कि कई बच्चों में बुखार के साथ पीलिया की समस्या भी बनी। नवजातों में भी इस तरह की समस्या बढ़ी है।
परामर्श के लिए दो घंटे तक वेटिंग
बुखार के मरीजों का आलम यह है कि निजी अस्पतालों की जनरल ओपीडी में पर्चा बनवाने के बाद भी मरीजों को दो घंटे तक वेटिंग में लगना पड़ रहा है। इस दौरान बुखार से तपते मरीजों की हालत खराब हो रही है, सरकारी अस्पतालों में भी ऐसा ही हाल है।