श्रमिकों की हड़ताल के कारण फैक्ट्रियां बंद पड़ी है
ब्लोइंग कारखानों में लगातार चौथे दिन भी कामकाज नहीं हुआ। कारखानों में कार्यरत श्रमिकों की हड़ताल के चलते कारखानों में सन्नाटा पसरा है। श्रमिकों की हड़ताल के चलते कारखानों में प्रतिदिन लाखों रुपये की गैस फुंक रही है।
सुहागनगरी के कारखानों में कार्यरत श्रमिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। न्यूनतम वेतन, ईएसआई, वेतन स्लिप सहित विभिन्न मांगों को लेकर ब्लोइंग के दो दर्जन कारखानों में कार्यरत करीब सात से आठ हजार श्रमिकों ने बिना किसी मांग पत्र के औजार छोड़ दिए हैं। सोमवार से प्रारंभ हड़ताल गुरुवार को लगातार चौथे दिन भी जारी रही। कारखानों में हड़ताल के चलते कारखानों में प्रतिदिन लाखों की गैस बेकार फुंक रही है। श्रमिकों के हड़ताल पर चले जाने के कारण उद्यमियों ने भले ही गैस का दबाव कम कर दिया है। इसके बावजूद भट्ठियों को गर्म रखने के लिए गैस की खपत हो रही है। उद्योग जगत से जुड़े सूत्रों की मानें तो कारखानों में हड़ताल के बावजूद प्रतिदिन 12 से 15 लाख की गैस फुंक रही है। ऐसे में श्रमिकों की हड़ताल यदि लंबी चली तो उद्योग जगत को करोड़ों की चपत लगना तय है। श्रमिकों की हड़ताल के चलते इंडस्ट्रियल एरिया से लेकर राजा का ताल स्थित दो दर्जन इकाइयों में सन्नाटा है। अब कारखाने चालू होने की सारी उम्मीदें 30 अप्रैल को होने वाली समझौता वार्ता पर टिकी हैं।