फिरोजाबाद जिले में स्वास्थ्य विभाग की एक शर्मनाक करतूत सामने आई है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय, दबरई में आशा, एएनएम की आयुष्मान आईडी बनाने का लक्ष्य पूरा करने के नाम पर करीब 40 से 45 संविदा कर्मचारियों को बंधक बनाकर बृहस्पतिवार देर रात तक जबरन काम कराने का आरोप लगा है। हालत यह थी कि ऑफिस के गेट पर ताला लटका दिया गया और मिन्नतें करने के बावजूद कर्मचारियों को घर नहीं जाने दिया गया।
घटनाक्रम के अनुसार बंधक बनाए गए कर्मचारियों में डाटा ऑपरेटर, बीपीएम और बीसीपीएम शामिल थे। उन्हें आशा और एएनएम की आयुष्मान आईडी जनरेट करने का जिम्मा सौंपा गया था। नाम न छापने की शर्त पर एक डाटा ऑपरेटर ने बताया कि अधिकारी दबाव बना रहे थे कि अभी आईडी बनाओ, लेकिन आईडी के लिए ओटीपी आशा और एएनएम के मोबाइल पर जाना था। रात के 11-12 बजे कोई भी आशा कार्यकर्ता फोन नहीं उठा रही थी। बिना ओटीपी के काम होना तकनीकी रूप से असंभव था, लेकिन हमारी बात सुनने के बजाय हमें कमरों में बंद कर दिया गया।
काम के भारी दबाव और घर न जाने देने की मजबूरी में कई कर्मचारी भावुक होकर रो पड़े। कर्मचारियों का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई कि उन्हें घर जाने दिया जाए और वे अगले दिन काम पूरा कर देंगे, लेकिन उनकी एक न सुनी गई। गेट पर ताला लगा होने के कारण कर्मचारी खुद को असहाय महसूस कर रहे थे।
किसी कर्मचारी को बंधक बनाने जैसी कोई बात नहीं है। आयुष्मान आईडी बनाने का काम कार्यालय में देर रात तक जारी रहा था। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इस कार्य में लगे हुए थे।
-रामबदन राम, सीएमओ
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