शिकोहाबाद। करोड़ों रुपये की जमीन को डकारने के मामले में शिकोहाबाद तहसील के सब रजिस्ट्रार ने भी बड़ा खेल करने का आरोप है। उन्होंने दो दिन के अंदर ही लगभग सात करोड़ रुपये की भूमि का नियमों के विरुद्ध जाकर एक साजिश के तहत बैनामा करवा दिया। भ्रष्टाचार के इस बड़े मामले में सब रजिस्ट्रार की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।
सिरसागंज के गांव रूधैनी में अधिवक्ता वीडी शर्मा की लगभग 110 बीघा भूमि का विवाद सुलझाने में उनकी 75 बीघा भूमि अधिकारी और भाजपा नेताओं के कूटनीतिक साजिश की भेंट चढ़ गई। अधिवक्ता का आरोप है कि उसकी लगभग 7 करोड़ रुपये की 75 बीघा भूमि का तत्कालीन एसडीएम विवेक राजपूत, नायब तहसीलदार नवीन कुमार, लेखपाल अभिलाख सिंह, भाजपा के जिला पंचायत सदस्य हरीश धनगर उर्फ कालू एवं भाजपा के मंडल अध्यक्ष अजीत कुमार ने रातोंरात अपने रिश्तेदारों एवं परिचितों के नाम बैनामा करवाते हुए बंदरबांट कर लिया। इसमें शिकोहाबाद तहसील के सब रजिस्ट्रार गौरव वर्मा ने भी मुख्य भूमिका निभाई।
अधिवक्ता का आरोप है कि सब रजिस्ट्रार गौरव वर्मा ने पहले से बैनामा के लिए लगी हुई फाइलों का नंबर हटाकर 11 जून को खतौनी में नाम चढ़ने के बाद ही 12 जून को कुल आठ बैनामा करने के आदेश दे दिए। हालांकि बताते हैं कि इस काम के बदले उन पर अधिकारियों का ही दबाव था। क्योंकि आमतौर पर बैनामा करने के लिए सब रजिस्ट्रार व तहसील में आमजन को जूझना पड़ता है, इससे सभी वाकिफ है।
24 घंटे में आखिर कैसे दी गई शेष रकम
अधिवक्ता का आरोप है कि बैनामा में यह दर्शाया गया है कि 20 हजार रुपये रजिस्ट्री के समय दिया गया है। अब बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि करोड़ों रुपये किस माध्यम से दिए गए। जबकि बैनामा में कहीं भी चेक
से रुपये देना नहीं दर्शाया गया है। जिस पर सब रजिस्ट्रार ने सफाई दी है कि रुपये दोनों पक्षों ने पहले लेना स्वीकार लिया था। अब यहां सबसे बड़ी बात यह है कि जब खतौनी में नाम 11 जून को चढ़ा था और 12 जून को बैनामे हुए तो आखिरकार करोड़ों रुपये की रकम को कितने टुकड़ों में और कब, 24 घंटे के अंदर ही अदा कर दिया गया।
एसडीएम ने 7 जून को कर दिया था आदेश
शिकोहाबाद। कुल भूमि 110 बीघा थी। 21 मई को फाइल एसडीएम कोर्ट में गई थी, जिसमें से 75 बीघा भूमि पर विवाद चल रहा था। 11 जून को तत्कालीन एसडीएम विवेक राजपूत के पेशकार ने वादी के अधिवक्ता को मामले में आदेश आने की जानकारी दी। जिसके चलते अधिवक्ता ने 11 को सवाल नकल डाला, तो 12 जून को नकल मिल गई। इसमें इस बात का खुलासा हुआ कि एसडीएम ने विवाद में आदेश तो 7 जून को ही कर दिए थे। जिसकी किसी को कानोंकान भनक तक नहीं मिली थी। 11 जून को खतौनी में नाम तक चढ़ गया था। वहीं 12 जून को रातोंरात सब रजिस्ट्रार ने 75 बीघा भूमि का बैनामा तक अलग-अलग लोगों के नाम करवा दिया।
बैनामा में चेक नंबर तक नहीं दर्शाया
शिकोहाबाद। अधिवक्ता का आरोप है कि सब रजिस्ट्रार की मिलीभगत से जो बैनामे रातोंरात हुए। वह इस जनपद के भी नहीं हैं। कोई जालौन का रहने वाला है तो कोई मैनपुरी का है। आखिरकार बैनामे में कहीं भी चेक का नंबर क्यूं नहीं दर्शाया गया।
हमारे पास खतौनी में नाम चढ़ने के बाद जो आदेश आया, उसी हिसाब से हमने बैनामे कराए हैं। बैनामे के नंबर लगना कोई सरकारी आदेश नहीं है। हम भीड़ होने पर सुविधा के हिसाब से नंबर देते हैं। रही बात भूमि के शेष रकम अदायगी की, तो हमने दोनों पक्षों से पूछा था कि रकम मिली या नहीं, तो दोनों पक्षों ने इस बात को स्वीकार कर लिया था। इसके चलते बैनामा करवाए गए।
गौरव वर्मा, सब रजिस्ट्रार, शिकोहाबाद