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चिकित्सा को पेशा नहीं, सेवा मानते हैं धरती के भगवान

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डा. इंद्रजीत चौरसिया, सचिव आईएमए - फोटो : FIROZABAD
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फिरोजाबाद। आजकल हर कोई किसी न किसी बीमारी से ग्रसित है और चिकित्सा का पेशा दिन रोज महंगा होता जा रहा है। निजी व बड़े अस्पतालों में आम लोगों को इलाज कराना उनके बूते से बाहर है। निजी अस्पतालों के इस प्रतिस्पर्द्धा के दौर में कुछ चिकित्सक वाकई अपनी सेवा के माध्यम से ‘धरती के भगवान’ नाम को सार्थक करने में जुटे हैं। आइये जानते हैं उनके बारे में।
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जिला अस्पताल ने ठुकराया, डॉ. निमित ने इलाज कर घर पहुंचाया
चलती ट्रेन से गिरकर घायल हुए युवक को जीआरपी जिला अस्पताल छोड़ गई थी। चार दिन वह बेहोशी की हालत में पड़ा रहा, किंतु किसी चिकित्सक ने उसका इलाज नहीं किया। सद्भावना समिति के सदस्य और सेवार्थ संस्थान ट्रॉमा सेंटर के न्यूरोसर्जन डॉ. निमित गुप्ता ने उसे आईसीयू में भर्ती कराया और निशुल्क इलाज किया। युवक की शर्ट पर लगी टेलर के नाम की चिट के जरिये उसके परिजनों से संपर्क कर उसे घर पहुंचाया। ऐसे ही एक महिला को उसके परिजन पैसों के अभाव में कूल्हा टूटा होने पर सड़क पर छोड़ गए थे। डॉ. निमित ने उसका उपचार भी निशुल्क किया।
हर शनिवार को निशुल्क रहती है परामर्श और दवा
कमलेश नर्सिंगहोम में स्त्री एवं प्रसूती रोग विशेषज्ञ डॉ. मिली अग्रवाल ने नारी समाज को स्वस्थ रखने का बीड़ा उठाया है। हर मरीज स्वस्थ रहे, इसके लिए डॉ. मिली प्रत्येक शनिवार को निशुल्क ओपीडी करती हैं। साथ ही मरीजों को दवाएं भी निशुल्क ही उपलब्ध कराई जाती हैं। वह करीब एक हजार से अधिक मरीजों का इलाज कर चुकी हैं।
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दस साल में 500 घरों में गूंजी किलकालरी
डॉ. रेनू गुप्ता पिछले दस सालों से नि:संतान दंपती की सूनी गोद भर रही हैं। एक दशक में 500 दंपती के घरों में किलकारियां गूंज चुकी हैं। जो दंपती टेस्ट ट्यूब तकनीक से बच्चा पैदा करने का खर्चा नहीं उठा पाते हैं, वो अपने इलाज को उनके पास आते हैं। डॉ. रेनू गुप्ता जनपद में 28 साल से प्रैक्टिस कर रही हैं, किंतु इंफर्टलिटी का काम उन्होंने 10 वर्ष से ही शुरू किया है। डॉ. रेनू कहती हैं कि टेस्ट ट्यूब सबसे अंतिम विकल्प है। मगर लोग अंजाने में इसे दूसरा विकल्प मान लेते हैं।
सरकारी चिकित्सक मरीजों से कर रहे धोखा
स्वास्थ्य विभाग के अधिकतर चिकित्सक मरीजों को धोखा दे रहे हैं। सीएमओ जब भी निरीक्षण करते हैं उन्हें स्वास्थ्य केंद्रों पर चिकित्सक गैरहाजिर मिलते हैं। हालांकि कई चिकित्सक मरीजों का सेवाभाव से इलाज भी कर रहे हैं। अप्रैल से अभी तक 17 चिकित्सक अनुपस्थित मिल चुके हैं। सरकारी अस्पतालों में चिकित्सकों के व्यवहार व उनकी कार्यशैली से भी मरीज व तीमारदार दुखी रहते हैं।
आईएमए नहीं मनाएगा डाक्टर्स डे
इस बार आईएमए ने डाक्टर्स डे पर कोई आयोजन नहीं रखा है। इस समय चिकित्सक अपना हक सरकार से मांग रहे हैं। सरकार से मांग की जा रही है कि डाक्टरों के लिए सरकार केंद्रीय सुरक्षा कानून लागू करे। आए दिन डाक्टरों पर हमले होते हैं। इसका नुकसान मरीजों को उठाना पड़ रहा है।
डॉ. उपेंद्र गर्ग - अध्यक्ष आईएमए।
एक चिकित्सक पूरी पढ़ाई करने के बाद, ट्रेनिंग करके प्रैक्टिस करता है। वहीं, झोलाछाप बिना डिग्री के हर रोग का इलाज कर देते हैं। यह समाज में बीमारियां बांटते हैं। इनके कारण ही चिकित्सा पेशा बदनाम हो रहा है। स्वास्थ्य विभाग को इन पर निगरानी करनी चाहिए।
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डॉ. इंद्रजीत चौरसिया, सचिव, आईएमए।
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