फिरोजाबाद। आज विश्व मधुमेह दिवस है। लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से यह दिवस मनाया जा रहा है। मधुमेह से उम्रदराज ही नहीं, बल्कि युवा भी शिकार हो रहे हैं। इसका कारण असंतुलित आहार और लाइफ स्टाइल में आया बदलाव है। चिकित्सकों के मुताबिक, मधुमेह (डायबिटीज) एक मेटाबॉलिक डिसऑर्डर है। जब इंसुलिन स्तर गड़बड़ाता है तो लोगों में मधुमेह बीमारी सामने आती है।अनियमित जीवन शैली से डायबिटीज (मधुमेह) के मरीजों की संख्या दिनोंदिन बढ़ती जा रही है। यह रोग पहले सिर्फ बुजुर्गों में देखने को मिलता था। लेकिन, अब युवा व बच्चे भी मधुमेह से ग्रसित मिलते हैं। ऐसे में लोग खानपान पर संतुलन रखकर मधुमेह से छुटकारा पा सकते हैं। मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में हर साल तीन हजार से अधिक मरीज मधुमेह का शिकार होकर इलाज कराने आते हैं।
डाॅ. समीक्षा भार्गव का कहना है कि वर्तमान में लोग फास्ट फूड की ओर अधिक आकर्षित हो रहे हैं। साथ ही भागमभाग भरी दिनचर्या में भूख लगने पर फास्ट फूड पर ही निर्भर रहना उनकी मजबूरी बन जाती है। बच्चे भी चाऊमीन, बर्गर, पिज्जा और कोल्डड्रिंक का मोह नहीं छोड़ पाते। इस कारण डायबिटीज के रोगियों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इनके अलवा आनुवंशिक और मोटापा भी डायबिटीज का प्रमुख कारण है। उन्होंने बताया कि खाली पेट रहने पर नार्मल व्यक्ति का शुगर स्तर 100 के नीचे होता है। वहीं जब शुगर का लेवल 125 से ऊपर हो जाता है, तब वह व्यक्ति डायबिटीज की चपेट में आ जाते हैं।
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मधुमेह के ये हैं लक्षण
-ज्यादा प्यास लगना, ज्यादा भूख लगना, वजन कम होना, पेशाब ज्यादा आना आमतौर पर मधुमेह के लक्षण माने जाते हैं। शुगर का स्तर बढ़ने पर प्राय: मरीजों के पेशाब में इंफेक्शन होने तथा गुर्दा फेल होने की भी समस्या सामने आती है।
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छह महीने में मिल चुके हैं 1800 मरीज
मेडिकल कॉलेज के फिजीशियन डॉ. मनोज कुमार ने बताया कि पिछले छह महीने में 1800 शुगर से पीड़ित मरीज चिह्नित किए गए हैं। इसमें पुरुषों की संख्या ज्यादा है। उन्होंने बताया कि शुगर बीमारी से चिह्नित हुए मरीजों की जांच, उपचार डाइट संबंधित परामर्श नियमित दिया जाता है। इसके अलावा शुगर के मरीजों को योग अपनाने की भी सलाह दी जाती है।