श्रीराधा कृष्ण महाराज की 117वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में आयोजित श्रीमद्भागवत पुराण ज्ञान यज्ञ के अंतिम दिन कृष्ण-सुदामा की सजीव लीला देखकर श्रद्धालु भावविभोर हो गए।
कथा व्यास पं. मुन्नालाल शास्त्री ने कहा कि सुदामा और कृष्ण भगवान जैसे मित्र मिल जाएं तो कल्याण हो जाएगा। सुदामा जी की भक्ति नि:स्वार्थ भाव की थी। ऐसे भक्त पर प्रभु अपनी कृपा जरूर करते हैं। भगवान के यहां अमीर-गरीब का कोई भेद नहीं है। सुदामा-कृष्ण की मित्रता सच्ची थी, लेकिन आज मित्रता स्वार्थ के लिए की जाती है। उन्होंने कहा कि ईश्वर की भक्ति ही जीवन का सार है। जीव के अंत:करण की शुद्धि के लिए ईश्वर का जाप जरूरी है। कथा समापन पर जयमान उत्तम चंद्र गुप्ता, पं. राघव शास्त्री, पं. विजय उपाध्याय मंदिर प्रबंधक अनिल कुमार पालीवाल, सुधीर कांत शर्मा, प्रमोद गुप्ता, पिंटू पालीवाल, आशीष बंसल, संजय गुप्ता, रमेश चंद्र बंसल, अनुग्रह गोपाल, कृष्ण गोपाल गुप्ता आदि मौजूद रहे।