बढ़ते प्रदूषण के कारण पेड़-पौधे सूख गए हैं
पृथ्वी को नुकसान पहुंचाने के लिए हम ही जिम्मेदार हैं। हमारी लापरवाही और गैरजिम्मेदाराना नजरिया बढ़ती समस्याओं का कारण है। हमारी रोजमर्रा की जिंदगी और बदले रहन सहन से पर्यावरण पर सीधा असर पड़ रहा है। पृथ्वी को नुकसान पहुंचाने में प्लास्टिक बहुत बड़ा कारण बनकर उभरा है। दिन की शुरूआत से लेकर रात में बिस्तर में जाने तक अगर गौर किया जाए तो आप पाएंगे कि प्लास्टिक ने किसी न किसी रूप में आपके हर पल पर कब्जा कर रखा है। कभी ना गलने वाली प्लास्टिक धरती को बंजर कर देती है। धरा को खूबसूरत बनाने के लिए फीरोजाबाद में सिर्फ अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन अभियानों में हकीकत के बजाय सिर्फ दिखावा है और इसका सबसे बड़ा नुकसान पृथ्वी को पहुंच रहा है। वहीं, विकास के लिए किए जा रहे प्रयास भी धरा की खूबसूरती को बिगाड़ रहे हैं। पेड़ों का कटान बड़े स्तर पर किया जा रहा है। जो गिरते जल स्तर और जल्दी-जल्दी भूकंप आने का कारण भी बन रहा है। जरूरत हमें खुद को जागरूक करने की है।
अभियान तो सिर्फ दिखावा हैं
पालिथीन का धड़ल्ले से प्रयोग हो रहा है। इसे रोकने के लिए अभियान चलाए गए लेकिन वह नाकाफी थे। लोग पूरी तरह जागरूक नहीं हुए।
पौधरोपण होने के बाद नहीं होती देखभाल
धरा पर पौधरोपण बहुत किए जाते हैं। इसके लिए सामाजिक संस्थाएं भी हजारों पौधे रोपती हैं तो प्रशासन भी करोड़ों का बजट खर्च करके लाखों पौधे लगवाता है। लेकिन अभियान खत्म होने के बाद उनकी देखभाल के लिए कोई सुध नहीं लेता है। सड़क निर्माण एवं अन्य विकास कार्य में बड़े स्तर पर पेड़ों का भी कटान हो रहा है।
हमें पृथ्वी के सौंदर्य एवं पर्यावरण पर ध्यान देना चाहिए। क्योंकि पृथ्वी पर संकट आएगा तो जलस्तर गिरेगा, प्रदूषण बढ़ेगा। जो हमारी आने वाली पीढ़ी के लिए घातक होगा। हमें चाहिए कि पालिथीन का प्रयोग बंद करें, पौधे लगाकर उसी देखभाल करें।
अभी तक पर्यावरण एसी, फ्रिज में जो गैस पड़ती है, उससे ओजोन परत में धीरे धीरे छिद्र हो रहा है। सूरज की किरणों को फिर आदमी बर्दाश्त नहीं कर पाएगा। त्वचा रोग होने की संभावना काफी बढ़ जाएगी। हर एक आदमी को सोचना होगा कि पर्यावरण प्रदूषित नहीं हो।
प्रोफेसर डा. यूएस पांडे, एसआरके डिग्री कॉलेज