कोर्ट से जारी था गैर जमानती वारंट
परवेज बेहद शातिर और कुख्यात अपराधी है। उसने अपनी पहचान छिपाने के लिए अपराध के रिकॉर्ड में अपने पिता का नाम चार बार बदला। वह वर्तमान में अलीगढ़ के थाना क्वार्सी क्षेत्र में एकता नगर महेशपुर नई आबादी, क्वार्सी, अलीगढ़ में रह रहा था। वहां पहचान छिपाकर ई-रिक्शा चलाता था। 18 मई 2006 से वह कोर्ट से स्थायी रूप से गैरहाजिर चल रहा था, जिसके बाद आगरा रेंज के डीआईजी स्तर से उस पर 50 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था।
पिता हिंदू, मां मुसलमान... प्रमोद से इस तरह बना परवेज
एसएसपी सौरभ दीक्षित ने बताया कि पुलिस पहले परवेज के दोस्तों तक पहुंची। वहां से अलीगढ़ निवासी उसकी बहन का पता चला। पता चला सौतेली बहन बबीना पुलिस की मुखबिर है। बबीना के जरिए पुलिस परवेज तक पहुंची तो पता लगा उसकी पिता हिंदू और मां मुस्लिम थी। मां ने दूसरी शादी की थी। जन्म के समय परवेज का नाम प्रमोद यादव था, जो कि इसके हाथ पर भी लिखा है। बाद में मां ने पति और बेटे दोनों का नाम बदल दिया। प्रमोद की जगह असलम नाम रखा। बाद में परवेज ने खुद अपना नाम बदल डाला। कभी आधार कार्ड या अन्य कोई पहचान संबंधी सरकारी दस्तावेज नहीं बनवाया। अलीगढ़ में जब भी गिरफ्तारी होती तो पार्षद से सत्यापित परवेज नाम का दस्तावेज जमानत के लिए कोर्ट में दाखिल करता था। इसके चलते उसे पकड़ना मुश्किल हो रहा था। पुलिस जब बबीना तक पहुंची तो उसे भनक लग गई और वह फिरोजाबाद में आकर छिप गया। मुखबिरों की सक्रियता से पुलिस को उसकी लोकेशन मिली और मुठभेड़ में गिरफ्तार के बाद गिरफ्तारी हुई।
http://