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विश्वास पात्र नौकर संजय को देख कर बोले-सेठ जी मिल गए...

Sat, 20 May 2017 11:25 PM IST
दीपक जैन
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घर पहुंचने पर बच्चों से मिलते संजय मित्तल।
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संजय मित्तल का अपहरण दोपहर 12 बजे हुआ। दोपहर दो बजकर छह मिनट पर एसएसपी को अपहरण की खबर मिली। चार बजे के आसपास उद्योगपति के परिवार के सदस्य पर फोन आया और शाम साढे़ छह बजे अपहरणकर्ताओं के चंगुल से संजय मुक्त हो गए। उद्योगपति के विश्वासपात्र नौकर भी फिरौती की रकम देने वाले स्थान पर पहुंचे थे। दोनों संजय को गाड़ी में देख बोले उठे सेठ जी मिल गए। इसके बाद वे शिक्षक के मकान पर ले गए, जबकि पुलिस उन्हें चरी के खेत से बरामद दिखा रही है। मामले में कई सवाल उछल रहे हैं, जिनके जवाब नहीं मिल पा रहे हैं। इससे पुलिस के खुलासे की कहानी में झोल लगता है।
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उद्योगपति संजय मित्तल शुक्रवार को दोपहर 12 नगला भाऊ चौराहा हाईवे से अगवा किए गए। पुलिस की वर्दी में उनकी इनोवा कार को दो लोगों ने रोका। यहां बता दें संजय के नजदीकी लोग बताते हैं कि कोठी से संजय मित्तल गाड़ी लाक करके चलते थे और सीधे फैक्ट्री जाकर ही लाक खोला जाता था। चालक बबलू यादव ने पहले शीशा खोल कर बात की। उसके बाद पुलिस वर्दी में बदमाशों ने पिस्टल तानी तो गेट खोल दिया। इसके बाद दो वर्दीधारी और दो अन्य यानी चार बदमाश गाड़ी के अंदर घुस गए। इसमें चालक की स्थिति पर लोग चर्चा जरूर कर रहे हैं लेकिन पुलिस ने चालक बबलू यादव को क्लीन चिट दी है। यूपी 100 के साथ थाना दक्षिण पुलिस को घटना की जानकारी दोपहर दो बजे से पहले ही हो गई थी लेकिन बकौल एसएसपी अजय कुमार उनको घटना की जानकारी दोपहर दो बज कर छह मिनट पर हुई। शुक्रवार रात को प्रेसवार्ता में एसएसपी ने खुद माना उन्होंने घटना की जानकारी देर से दी गई..। क्यों...दी गई, जबकि थाना पुलिस को घटना की जानकारी पहले हो गई थी। 12 बजे अपहरण हुआ दोपहर दो बजे के बाद जिले की पुलिस तब हरकत में आयी जब नगर विधायक मनीष असीजा ने मामला संज्ञान में देने पर डीजी पुलिस ने जिला पुलिस को निर्देश दिए। यानी दोपहर दो बजे के बाद पुलिस का मूवमेंट हाईवे पर शुरू हुआ।  
संजय की बरामदगी और पुलिस की चरी के खेत वाली कहानी में विरोधाभास है।  उद्योगपति की सिम से उनके घर फोन आने के बाद का जो घटनाक्रम है वह आफ द रिकार्ड बहुत कुछ इशारा करता है। पुलिस के साथ-साथ उद्योगपति के विश्वासपात्र नौकर उस दिशा में सक्रिय हो गए, जहां फिरौती की रकम देना तय हुआ। टूंडला के बसई गांव के पास कृष्णापुरम कालोनी में संजय को लेकर अपहरणकर्ता बाद में पहुंचे पहले एफएम वाटिका पर काम करने वाले दो नौकर पहुंच गए थे। यहां अपहरणकर्ता जैसे ही संजय मित्तल को लेकर पहुंचे उनके कर्मचारियों ने पहचान लिया और चीख पडे़ सेठ जी मिल गए...। इस कालोनी में रहने वाले प्रत्यक्षदर्शी बताते हैं कि अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूट कर जैसे ही संजय भागे उनके दोनों कर्मचारी उनको एक शिक्षक के मकान में ले गए इन्हें बचाओ यह एफएम वाटिका के मालिक हैं। बदमाश इनके पीछे पड़े हैं...। परिवार ने साहस दिखाया और छत पर मोर्चा ले लिया। कुछ देर बाद पुलिस भी इस स्थान पर पहुंच गई। पुलिस ने अपनी कहानी में संजय को बसई गांव में चरी के खेत से मुक्त दिखाया जबकि घटनाक्रम पर गौर करें तो उद्योगपति किसी तरह अपहरणकर्ताओं के चंगुल से छूट कर भागे और उनकी मदद के लिए उनके यहां काम करने वाले कर्मचारी पहुंच गए। फिरौती तो लेकर कयास जरूर हैं लेकिन पुलिस के साथ-साथ उद्योगपति के परिवारीजन इससे साफ इंकार करते हैं।
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