फिरोजाबाद। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम की ओर से विगत दिनों लिए गए दूध, हल्दी और पिसे लाल मिर्च आदि के नूमनों में मिलावट पाई गई है। प्रयोगशाला से सोमवार की देर शाम आई 13 रिपोर्ट में से 10 के नमूने फेल आए हैं। इसमें पांच खाद्य पदार्थ असुरक्षित बताए गए हैं। टीम की ओर से मिलावटी सामान की बिक्री करने वाले लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने 26 अगस्त को ककरु कोठी स्थित विक्रेता अरुण शर्मा की दुकान से हल्दी और लाल मिर्च के पाउडर का नमूना लिया गया था। इसमें मिलावट पाई गई है। हल्दी और मिर्च के पाउडर में अखाद्य रंग की मिलावट पाई गई है। वहीं, टीम ने हाथवंत के कनवारा में 30 दिसंबर 2019 को दूधिया गौरव कुमार से दूध के नमूना भी लिया था। इसमें भी मिलावट पाई गई है। दूध में डिटर्जेंट, यूरिया की मिलावट मिली है। टीम ने एटा रोड टूंडला में पांच मार्च को हरी सिंह की डेयरी पर छापा मारा था।
यहां पर दूध के साथ एक केमिकल पाया गया। हाइवे पर अरौंज स्थित आमिर खान के प्रतिष्ठान से कचरी का नमूना लिया था। केमिकल रंग मिले होने के कारण प्रयोगशाला ने इसे असुरक्षित घोषित किया है। उधर, दाऊदजी मिष्ठान भंडार से पांच मार्च को पनीर का नमूना लिया था, जो मानक के विपरीत पाया गया है। प्रवीन पेटीज, गांधी पार्क से चिली सास का नमूना लिया। यह गुणवत्ता परक नहीं मिला है। चनौरा स्थित सतीशचंद्र दूधिया से दूध का नमूना लिया, इसमें पानी की मिलावट मिली। वहीं, हाथवंत में दूधिया इनोस खान से दूध का नमूना लिया, इसमें भी मिल्ट फैट कम मिला। रामअवतार निवासी अरमरा जट से लिया दूध में पानी की मिलावट पाई गई है।
लीवर और फेफड़ों की हो रही बीमारी
वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. एसपीएस चौहान का कहना है कि खाद्य पदार्थों में तेल और मसाले में मिलावट सेहत के लिए हानिकारक है। मिलावटी खाद्य पदार्थ लीवर, फेफड़े और हार्ट पर सीधा प्रभाव डालते हैं। आज के दौर में पेट की बीमारियां बढ़ने की वजह ही मिलावट है।
ऐसे करें मिलावटी हल्दी की पहचान
खाद्य सुरक्षा विभाग के जिला अभिहित अधिकारी डॉ. सुधीर कुमार ने बताया कि हल्दी पाउडर देखने में गहरा रंग का होता है। उसमें रंग की मिलावट हो सकती है। शुद्ध हल्दी हल्के पीले रंग की होती है। हल्दी को पानी में डालने पर अगर उसका रंग जल्दी गायब हो जाए तो समझिए कि वह मिलावटी है।
मिलावटी सामान बेचने वालों के विरुद्ध अभियान चलाया जा रहा है। जनता से अपील है कि वह मिलावटी सामान न खरीदे। जो नमूने असुरक्षित पाए गए हैं, उन विक्रेताओं के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई जाएगी। जिले में 13 में से 10 नमूने फेल आए हैं। -डॉ. सुधीर कुमार, जिला अभिहित अधिकारी
पैकिंग और एक्सपायरी डेट देख कर खरीदें सामान
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम के अधिकारी बताते हैं कि बाजार में लोकल कंपनियों के मसालों की खपत सबसे ज्यादा है। इनके पैकेटों पर न तो पैकिंग की तारीख होती है और न ही एक्सपायरी डेट लिखी होती है। जबकि नियम है कि पैकेट पर पैकिंग व एक्सपायरी की तारीख अनिवार्य तौर लिखी होनी चाहिए। लोग इसे देखकर ही सामान खरीदें।