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अशोक दीक्षित सहित एक दर्जन को आजीवन कारावास

Fri, 10 Jul 2015 11:39 PM IST
ब्यूरो,अमर उजाला फीरोजाबाद
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बहुचर्चित शिक्षक सुमन यादव हत्याकांड के आरोपी अशोक दीक्षित सहित सभी एक दर्जन आरोपियों को अपर सत्र न्यायाधीश पंचम आरपी सिंह ने दोषी मानते हुए आजीवन कारावास एवं बीस-बीस हजार अर्थदंड की सजा सुनाई। फैसला सुनाने के दौरान न्यायालय कक्ष भीड़ और पुलिसफोर्स से खचाखच भरा रहा। फैसले के बाद आदेश की प्रति लेने के लिए अशोक दीक्षित काफी देर तक कक्ष में ही उपस्थित रहे।
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थाना दक्षिण की आवास विकास कालोनी, सुहागनगर के सेक्टर एक निवासी भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष डा. लक्ष्मी नरायन यादव के भाई एवं तिलक कालेज के शिक्षक सुमन यादव की विगत 12 अक्तूबर 2007 को सुबह 8.30 बजे हत्या कर दी गई थी। उस समय वह अपने बेटे हर्ष के साथ फल खरीदने गए थे। हत्याकांड में मृतक के भाई ओम प्रकाश यादव ने थाना दक्षिण में आगरा के शहीद नगर निवासी अशोक दीक्षित, उनके भाई पप्पू एवं संदीप दीक्षित पुत्रगण रामनरायन दीक्षित और थाना मटसेना क्षेत्र के करकौली निवासी सुरेंद्र गुर्जर, वीरभान सिंह गुर्जर को नामजद एवं तीन अज्ञात के खिलाफ थाना दक्षिण में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। पौने आठ वर्ष पुराने मामले में अपर सत्र न्यायाधीश पंचम रामपाल सिंह ने आठ जुलाई को ही सभी आरोपियों को दोषी करार दे दिया था। शुक्रवार सुबह मामले में फैसला आना था। सुबह से ही न्यायालय प्रांगण में पुलिस फोर्स तैनात कर दिया गया था। अपराह्न करीब दो बजे अपर सत्र न्यायाधीश पंचम ने अपना फैसला सुनाया। अपर जिला शासकीय अधिवक्ता मकरंद सिंह यादव ने बताया कि अशोक दीक्षित, सुरेंद्र सिंह गुर्जर, वीरभान सिंह गुर्जर, संदीप, आशू उर्फ आशीष गोयल, स्वदेश भारद्वाज, पप्पू दीक्षित उर्फ अजय दीक्षित, संजय दीक्षित को धारा 302 में दोषी मानते हुए सश्रम आजीवन कारावास एवं बीस-बीस हजार के अर्थदंड लगाया है। अर्थदंड अदा नहीं करने पर छह-छह माह का अतिरिक्त कारावास होगा। अभियुक्त सुरेश, पंचम, राजेश और देवेंद्र को 120बी एवं 302 का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा एवं बीस-बीस हजार के अर्थदंड से दंडित किया है। अभियुक्तगणों पर सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और विचारण के दौरान जेल में बिताई अवधि उनकी सजा में समायोजित की जाएगी। वादी की ओर से अधिवक्ता अब्दुल सलाम एडवोकेट, अजय यादव एडवोकेट, महेश यादव एडवोकेट ने पैरवी की।

दोषमुक्त होने पर खुशी जताई
अपर सत्र न्यायाधीश पंचम आरपी सिंह के फैसला सुनाने के दौरान वीरभान सिंह उर्फ वीरो, अशोक दीक्षित, स्वदेश भारद्वाज को 25 आयुध अधिनियम, सुरेंद्र सिंह गुर्जर को धारा 411 में दोषमुक्त किए जाने पर न्यायालय में मौजूद अभियुक्तों ने खुशी जाहिर की।
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फैसले की प्रति लेने पर अड़े दीक्षित
शिक्षक सुमन यादव हत्याकांड में अशोक दीक्षित सहित सभी एक दर्जन आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाने के बाद अपर सत्र न्यायाधीश पंचम आरपी सिंह के स्टाफ ने फैसले पर हस्ताक्षर करने को कहा तो अशोक दीक्षित ने हस्ताक्षर से इंकार कर दिया। वह बोले, कि पहले फैसले की प्रति दिलाओ, तभी हस्ताक्षर करूंगा। फैसला की प्रति करीब एक सैकड़ा पेज की होने के कारण 1200 पेज की जरूरत थी। ऐसे में अशोक दीक्षित को काफी देर तक इंतजार करना पड़ा। बाद में, शाम पांच बजे प्रति मिली।

छावनी में तब्दील रहा न्यायालय प्रांगण
शिक्षक सुमन यादव हत्याकांड का फैसला सुनाए जाने के कारण पुलिस प्रशासन सुबह से ही अलर्ट था। न्यायालय के सभी गेटों पर पुलिस एवं पीएसी के जवान तैनात थे। न्यायालय प्रांगण के सभी गेटों पर सघन तलाशी की गई। सीओ सिटी राजेश चौधरी के निर्देशन में सीओ सदर जगदीश सिंह, सीओ टूंडला प्रशांत कुमार के ही साथ एसओ मटसेना, एक कंपनी पीएसी, दो क्यूआरटी के साथ काफी पुलिस बल तैनात था। कंट्रोल रूम से घटनास्थल की पल-पल की जानकारी ली जा रही थी। न्यायालय कक्ष की ओर दीक्षित समर्थकों की भीड़ जुटती तो पुलिस कर्मी उन्हें भगा रहे थे।

सीओ ने फेंके कपड़े, सिपाहियों को फटकारा  
फैसला आने के बाद प्रति लेने के लिए न्यायालय कक्ष में मौजूद अशोक दीक्षित के दो साथियों को पुलिसकर्मी टॉयलेट के लिए नीचे ले जाने के बाद न्यायालय कक्ष की ओर लाए तो एक आरोपी के हाथ में परिजनों द्वारा दिए गए कपड़े थे। सिपाहियों ने इशारा किया कि सीओ साहब यदि कहेंगे तो ले जाओ। उसने सीओ सदर जगदीश सिंह को जैसे ही थैली दी तो उन्होंने थैली फेंकने के साथ सिपाहियों को फटकार लगाई।


न्याय नहीं मिला, अब करेंगे अपील: दीक्षित
फैसला आने के बाद अशोक  दीक्षित ने ‘अमर उजाला’ से बातचीत में कहा कि न्यायालय के फैसले का मैं  स्वागत करता हूं। इतना ही कहूंगा कि न्याय नहीं मिला है। जनता खुद ही जानती है  कि घटना क्या थी और फैसला दो वर्ष, तीन वर्ष और चार वर्ष बाद भी आ सकता था। जानबूझकर इसे आगे बढ़ाया गया। हमारे कारोबार से जुड़े लोगों को जान बूझकर फंसाया गया। हम अब आगे अपील  करेंगे। अशोक दीक्षित के भाई पप्पू दीक्षित एवं सुरेंद्र सिंह गुर्जर ने न्यायालय की प्रक्रिया पर सवाल उठाए। इतना सुनते ही अशोक दीक्षित ने दोनों को चुप रहने की सलाह दी।

न्याय से खुश, अब फांसी के लिए लडूंगा: लक्ष्मी नारायण
सुमन यादव हत्याकांड में पैरवी कर रहे उनके भाई और भाजपा नेता लक्ष्मीनारायण यादव ने कहा कि वे न्यायालय के फैसले से खुश हैं। लेकिन अब आरोपियों को फांसी दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट तक लड़ाई लड़ेंगे। साथ ही प्रशासन से भी फांसी के लिए पैरवी करने की अपील करेंगे।  उनका कहना है कि यह जीत केवल उनके परिवार की नहीं बल्कि समाज के हर उस पीड़ित की है जो न्याय के लिए नहीं लड़ सका। उन्होंने कहा कि अशोक दीक्षित यदि उच्च न्यायालय में अपील करेंगे तो वहां भी पूरी ताकत के साथ मुकदमे की पैरवी करूंगा।
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