फिरोजाबाद। कोरोना के संक्रमितों की बढ़ती संख्या को ध्यान में रखते हुए सरकारी विभागों और अस्पतालों को जिलाधिकारी चंद्रविजय सिंह ने निर्देश दिए थे कि वे अपने यहां हेल्पडेस्क बनाएं। बिना मास्क के किसी को एंट्री नहीं दी जाए, सैनिटाइजर की व्यवस्था हो। लेकिन मंगलवार को सरकारी विभागों में अमर उजाला ने जाकर पड़ताल की तो नगर निगम कार्यालय, जिला अस्पताल, ओपीडी, बीएसए कार्यालय या जिला मुख्यालय- सभी जगह पर कोविड हेल्पडेस्क खाली मिली। वहीं कार्यालयों के अंदर स्टाफ बिना मास्क के काम करता दिखा। सरकारी विभागों की पड़ताल की प्रस्तुत है लाइव रिपोर्ट....
दृश्य एक : नगर निगम में घड़ी की सुइयां 12.26 पर थीं। निगम की हेल्पडेस्क खाली पड़ी थी। बैठने को कोई कुर्सी तक नहीं रखी दिखाई दी। आगे बढ़कर देखा तो एक बोर्ड खंभे के सहारे टिका रखा था। उसमें कोरोना से सावधानी के तरीके लिखे थे। आगे पानी से भरी टंकी रखी थी, लेकिन साबुन खत्म हो चुका था। सैनिटाइजर की खाली बोतल अवश्य स्टैंड में फंसी दिखाई दी। निगम प्रांगण में कुछ मास्क लगाए थे तो कुछ बिना मास्क के घूमते दिखाई दिए। फोटो खिंचने के डर से स्टाफ ने अवश्य जेब में रखे मास्क को लगा लिया।
दृश्य दो : जिला अस्पताल की सरकारी इमरजेंसी (ट्रॉमा सेंटर) की हेल्पडेस्क खाली थी। स्टाफ के रूप में तैनात कर्मचारी नदारद थे। कुर्सी पर सुरक्षाकर्मी लेखपाल सिंह बैठे थे। फोटो खींचते ही बाहर निकल आए। पूछने पर बोले, स्टाफ था लेकिन कहीं चला गया। मरीजों के तीमारदार एक्सीडेंट में घायल की तलाश में आए थे। मास्क बेचने वाला युवक सक्रिय था। ट्रॉमा सेंटर के गेट पर लगा सैनिटाइजर का बॉक्स खाली था। स्टाफ का कहना था कि अस्पताल में कार्यरत होने के बाद भी मास्क नहीं मिलते हैं।
दृश्य तीन : जिला अस्पताल के ओपीडी काउंटर पर बनी कोविड हेल्पडेस्क खाली थी। यहां मौजूद युवक खुद मास्क नहीं लगाए था। पूछने पर पहले नाम बताने तक को तैयार नहीं हुआ। बाद में बोला कि मेरी तो यहां ड्यूटी ही नहीं थी। मैं तो यूं ही बैठ गया था। फोटो खिंचता देखकर संविदा के कई स्टाफ पहुंच गए। बोल पड़े कि जब स्टोर में ही मास्क नहीं है तो फिर कहां से लगाएं। देख लो, यहां तो सैनिटाइजर बॉक्स तक खाली पड़े हैं। मरीज के साथ काफी तीमारदार बिना मास्क के घूम रहे थे।
दृश्य चार : घड़ी में लगभग एक बजने वाला था। जिला मुख्यालय स्थित कलक्ट्रेट प्रांगण में हेल्पडेस्क खाली पड़ी थी। कोई कर्मचारी मौजूद नहीं मिला। स्टाफ से पूछा तो बोले कि अभी कहीं चले गए होंगे। सैनिटाइजर के साथ अन्य इंतजाम भी नहीं थे। फरियाद लेकर आने वाले फरियादी मास्क लगाकर अवश्य पहुंचे थे। कुछ लोग बिना मास्क के घूम रहे थे। जिला पूर्ति अधिकारी कार्यालय में राशन डीलरों की भीड़ लगी थी। कोई राशन डीलर मास्क नहीं पहने हुए था। इसी तरह का आलम पूर्ति विभाग में था। कोई अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहा था।
दृश्य पांच : बीएसए कार्यालय के गेट पर प्रवेश करते ही लिखा था कि बिना मास्क के प्रवेश वर्जित है। अंदर जाकर देखा तो एक महिला शिक्षिका नवजात को गोद में लिए बिना मास्क के बैठी थी। हेल्पडेस्क शीशे के गेट के सहारे बनी थी, लेकिन दोनों ओर लगी डेस्क पर कोई मौजूद नहीं था। अंदर देखा तो कोई स्टाफ मास्क नहीं पहने था। बाहर शिक्षक बिना मास्क के आपस में बात करते दिखाई दिए। इस तरह का आलम यहां देखने को मिला।
दृश्य छह : विकास भवन स्थित कार्यालय के मुख्य गेट पर तैनात जवान थर्मल स्क्रीनिंग के साथ मास्क का प्रयोग करने की हिदायत देते दिखाई दिए। स्क्रीनिंग कराने के बाद जिनका टेम्प्रेचर अधिक था, उनको बाहर रोका जा रहा था। थोड़ी देर आराम के बाद दोबारा चेकिंग करके प्रवेश दिया जा रहा था ताकि कोरोना नियमों का पालन किया जा सके। आपत्तियां दर्ज कराने के लिए ग्रामीणों के आने के कारण यहां खास सावधानी बरती जा रही थी। यहां की व्यवस्थाओं को देखकर हर कोई सहमत दिखा। अधिकांश स्टाफ मास्क लगाकर अपना कार्य करता दिखा।