फिरोजाबाद। कोरोना संक्रमण से लड़ने में सावधानी के साथ-साथ शरीर की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए तरह-तरह के उपाय किए जा रहे हैं। बुजुर्गों के साथ-साथ बच्चों पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। दादा, नानी के नुस्खे अपनाए जा रहे हैं। बच्चों को डिब्बा बंद दूध और आहार की जगह मां का दूध, दाल का पानी, चावल का माड़ और दलिया दिया जा रहा है। ताकि उन्हें बीमारियों से लड़ने की शक्ति मिल सके।
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने दो साल तक के बच्चों को डिब्बा बंद दूध पिलाने से मना किया है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग ने आशाओं के माध्यम से महिलाओं को जागरूक करने का निर्णय लिया है। बाल विकास सेवा एवं पुष्टाहार विभाग ने कहा है कि स्तनपान करने वाले बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक रहती है। निमोनिया एवं अन्य घातक बीमारियों से लड़ने की क्षमता भी बच्चों में विकसित हो जाती है। डब्ल्यूएचओ ने पत्र का हवाला देते हुए कहा कि धात्री महिलाएं हर हाल में छह माह तक स्तनपान कराएं। इसलिए गर्भवती व धात्री महिलाओं को दूध की बोतल एवं कृत्रिम आहार न दिया जाए।