फिरोजाबाद। तपती धूप में भी मजदूरों के कदम थम नहीं रहे हैं। जहां जैसा साधन मिल रहा है, उससे मजदूर घर पहुंचने की कोशिश में हैं। न तल्ख धूप की चिंता है और न भूख-प्यास का अहसास। बस किसी तरह अपने गांव और अपने घर पहुंचने की जल्दी में मजदूरों का कारवां सुहाग नगरी के हाईवे से लगातार गुजर रहा है। औरेया में दर्दनाक हादसे के बाद भी सुहाग नगरी के हाईवे पर मेटाडोर, ट्रक और कैंटर में जोखिम भरा सफर करते मजदूरों की भीड़ है। छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लिए महिलाएं बस मंजिल की ओर चलती जा रही है।
ईद मनाने जयपुर से फर्रुखाबाद जा रहे 15 लोग
मूलरूप से फर्रुखाबाद के रहने वाले सलीम और उसके साथी जयपुर में काम करते हैं। ईद का त्योहार मनाने के लिए लॉकडाउन के बीच सलीम अपने साथियों औश्र परिवार के साथ जयपुर से फर्रुखाबाद के लिए निकले। 15 लोगों ने जयपुर से फिरोजाबाद तक के लिए आठ हजार रुपये में वाहन किया। वाहन से सुबह सात बजे वे सभी लोग उसायनी स्थित ओवरब्रिज के नीचे पहुंच गए।
यहां से फर्रुखाबाद के लिए कोई वाहन नहीं मिला तो सलीम और उसके साथी परिवार के साथ ओवरब्रिज के नीचे ही विश्राम करने के लिए बैठ गए। इस बीच एक ट्रक यहां से गुजरा तो सलीम ने फर्रुखाबाद छोड़ने के लिए कहा। ट्रक चालक ने सलीम और उसके साथियों को फर्रुखाबाद तक छोड़ने के लिए दस हजार रुपये की मांग की। ट्रक राशन सामग्री लेकर फर्रुखाबाद होते हुए शाहजहांपुर जा रहा था। भाड़ा अधिक होने के कारण सलीम और उसके साथियों ने जाने से मना कर दिया।
चार बाइक से 12 लोग हरियाणा से जा रहे बंगाल
मूलरूप से पश्चिम बंगाल के जिला मालदा टाउन निवासी रज्जाक, अलीम, रहीम और हसन हरियाणा में प्राइवेट कंपनी में नौकरी करते हैं। लॉकडाउन के बीच घर जाने के लिए कोई साधन नहीं मिला तो सभी लोग अपने परिवार और जरूरी सामान लेकर बाइक से मालदा टाउन के लिए चल दिए।
शुक्रवार देर रात ये लोग हजरतपुर के समीप पहुंचे। यहां आसपास आबादी को देखकर सड़क किनारे फुटपाथ पर चादर आदि बिछाकर रात्रि में विश्राम किया। साथ लाए सामान से सुबह नाश्ता करने के साथ आगे का सफर तय करना शुरू कर दिया। बाइक से सफर करने में बच्चों को काफी दिक्कत हो रही है लेकिन परिवार की महिलाएं उनको हिम्मत बंधा रही हैं। चार बाइक पर 12 लोग घर जाने के लिए निकले हैं।
हरियाणा से रेहड़ी पर बिहार के लिए निकला परिवार
कभी ट्रांसपोर्ट से रेहड़ी में माल लादकर व्यापारियों के प्रतिष्ठानों तक पहुंचाने के लिए पसीना बहाने वाले जगदीश अब रेहड़ी में परिवार को बैठाकर बिहार जाने को मजबूर है। जगदीश ने बताया कि वह बिहार का रहने वाले हैं और हरियाणा में रेहड़ी चलाते है। इतना पैसा नहीं कि परिवार के साथ भाड़े से घर तक पहुंचा जा सके। जो था, वो खर्च हो गया। ऐसे में परिवार के साथ रेहड़ी से घर जा रहे है।
रास्ते में भोजन आदि की दिक्कत को दूर करने के लिए गैस सिलिंडर और राशन सामग्री भी साथ लेकर चल रहे है। आबादी मिलने पर रेहड़ी को हाईवे किनारे खड़ा कर खाना बनाने के साथ परिवार के साथ आराम कर लेते हैं।
ट्रक से पटना के लिए निकले पचास मजदूर
घर जाने के लिए प्रवासी मजदूर जान तक जोखिम में डाल रहे हैं। दिल्ली में नौकरी करने वाले करीब 50 मजदूर ट्रक में सवार होकर दिल्ली से पटना जा रहे हैं। टूूंडला टोल के समीप खाना मिलता देख ट्रक रुकवाने के साथ ही सभी लोगों ने खाना खाया। इसके बाद ट्रक में बैठ गए।
इस दौरान मजदूरों ने बताया कि ट्रक भी उनके जिले का है, जो माल लेकर आया था और खाली जा रहा था। इस कारण हम लोग ट्रक से अपने घर जा रहे है।
प्रवासी मजदूरों के बच्चों को दूध की भी है व्यवस्था
प्रवासी मजदूरों को भोजन की व्यवस्था का जिम्मा टूंडला क्षेत्र के गांव मदावली के ग्रामीणों ने उठा रखा है। ग्रामीण सुखवीर, धीरज, राहुल, कुलदीप और रवि दर्शन अपने स्तर से पैसा एकत्रित करने के साथ ही टूंडला टोल के समीप मजदूरों के लिए भोजन की व्यवस्था कर रहे हैं।
इतना ही नहीं बच्चों के लिए दूध और चाय की व्यवस्था भी ग्रामीणों द्वारा की जा रही है। सुखवीर ने बताया कि इसके लिए उनको ग्रामीणों का भी सहयोग मिल रहा है।