टीबी वार्ड में मिलती हैं कच्ची रोटियां।
केंद्र एवं राज्य सरकार की करोड़ों के बजट भी मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है। योजनाओं को सिर्फ कागजों में ही अमलीजामा पहनाया जाता है। सुविधाओं के नाम पर महज खानापूरी की जाती है। जिला अस्पताल और क्षय रोग वार्ड में भी मरीज सरकारी व्यवस्थाओं की दुर्दशा के आगे लाचार दिखे। टीबी वार्ड में भर्ती मरीजों का दर्द उबर के सामने आया। मरीजों को कहना था कि आधा पेट भोजन दिया जाता है। मरीजों के लिए घर से टिफिन लगाकर लाना पड़ता है। वहीं, रोटियां कच्ची वितरित दी जाती है।
दृश्य एक
कड़ाके की सर्दी में मरीजों को दिया सिर्फ एक कंबल
समय 12 बजे: वार्ड नं.-2
जिला अस्पताल का वार्ड नंबर दो। मरीजों को ओढ़ने के लिए सिर्फ एक कंबल दिया गया है। भर्ती मरीज रामेश्वर का कहना था कि दूसरा कंबल मांगा तो मना कर दिया। ठंड में मुश्किल से रात गुजारी। अगले दिन घर से रजाई मंगानी पड़ी। भरतेश कुमार कुमार ने बताया कि मरीजों को रजाई-कंबल घर से ही लाने पड़ते हैं। इतने पतले कंबल हैं कि एक से ठंड रुकती नहीं है।
दृश्य दो
समय 12.30 बजे। : जिला क्षय रोग वार्ड (टीबी)
10 से 15 मरीज काफी समय तक रुकते हैं। फिर भी वार्ड की खिड़की टूटी थी। मरीजों ने टूटी खिड़कियों पर कागज लगा दिया था। ऐसे ठंड बहुत लगती है लेकिन मजबूरी है। वार्ड में भर्ती मरीज सिमरन ने कहा कि टूटी खिड़कियों से ठंडी आती है। ओढ़ने के लिए सिर्फ एक कंबल दिया जाता है।
सेब-बिस्कुट हुआ बंद
मरीजों का कहना था कि अब तक सेब और बिस्कुट का प्रतिदिन वितरण किया जाता था। लेकिन एक जनवरी से सेब और बिस्कुट भी बंद हो गया है।
क्या कहते हैं अधिकारी
हम वार्डों में जाकर मरीजों से पूछेंगे कि उन्हें क्या क्या दिक्कतें हैं। मरीजों की समस्याओं का तत्काल निदान कराया जाएगा। किसी भी प्रकार की दिक्कतें मरीजों को नहीं होनी दी जाएगी।
डा. अजय अग्रवाल, सीएमएस