फिरोजाबाद। टूंडला के गांव प्रतापपुरा के छह लोगों में संक्रमण की पुष्टि के कबाद स्थानीय लोगों के संपर्क में आने से स्वास्थ्यकर्मी भी बच रहे हैं। ऐसे में मंगलवार को गांव प्रतापपुर की गर्भवती महिला को कई घंटे प्रसव पीड़ा से जूझना पड़ा। इलाका सील होने के कारण गांव के अंदर एंबुलेंस नहीं जा सकी। बाद में, सौ शैया अस्पताल के बाहर दो घंटे से अधिक समय तक महिला को एंबुलेंस में ही रहना पड़ा। तकरीबन दो घंटे बाद स्टाफ ने बमुुश्किल प्रसव कराया। हालांकि महिला का सैंपल लेकर जांच के लिए सैफई पीजीआई भेजा है।
गांव प्रतापपुर निवासी सविता पत्नी जितेंद्र कुमार को मंगलवार सुबह प्रसव पीड़ा हुई। जितेंद्र ने 102 डायल किया तो थोड़ी देर बाद एंबुलेंस पहुंच गई लेकिन इलाका सील होने के कारण पुलिस ने एंबुलेंस को अंदर नहीं जाने दिया। जितेंद्र ने बताया कि एंबुलेंस चालक ने फोन कर बता दिया कि वह गांव के बाहर ही प्रसूता को ले आएं। जितेंद्र अपनी पत्नी को लेकर गांव के बाहर जाने लगा तो पुलिसकर्मियों ने उसे रोक लिया। काफी देर की बहस के बाद पुलिसकर्मी माने।
पुलिसकर्मियों ने टूंडला स्वास्थ्य केंद्र पर फोन लगाया लेकिन वहां पर प्रसव कराने से मना कर दिया गया। इस पर 102 एंबुलेंस चालक गर्भवती को लेकर सौ शैया अस्पताल पहुंचा। हालांकि अस्पताल के स्टाफ ने प्रतापपुर गांव का नाम सुनकर भर्ती कराने से इंकार कर दिया। प्रसूता एंबुलेंस में ही दो घंटे से अधिक समय तक कराहती रही। मामले की जानकारी पर सीएमएस डॉ. साधना राठौर स्वयं बाहर आई और प्रसूता को भर्ती करा प्रसव कराया। प्रसूता ने बालक को जन्म दिया। हालांकि गांव प्रतापपुर से आने के कारण स्वास्थ्य विभाग ने कोरोना की जांच के लिए महिला का सैंपल जांच के लिए भेजा है।