कस्बे मोहल्ला मोहल्ला शंभू नगर में विपुल प्रताप सिंह उर्फ बाबू (9) की
फांसी लगाकर हत्या कर दी गई। उसका शव कमरे की चौखट से लटका मिला। मकान का
दरवाजा अंदर से बंद होने के चलते पहले इसे आत्महत्या का मामला माना जा रहा
था, लेकिन परिवारीजनों ने हत्या का मामला बताते हुए अज्ञात में तहरीर दी
है। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम के बाद ही सही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी
कि यह मामला आत्महत्या का है या हत्या का।
विपुल शंभूनगर निवासी महेंद्र प्रताप सिंह उर्फ संजय का पुत्र और यंग
स्कोलर्स एकेडमी में तीसरी कक्षा का छात्र था। संजय मंगलवार सुबह अपनी सास,
पत्नी प्रतिमा उर्फ अंशू को साथ लेकर फीरोजाबाद डाक्टर के यहां गए थे। घर
पर विपुल अकेला था। उसकी छोटी बहन प्रियानी (6) एग्जाम देने स्कूल गई थी।
दोपहर 12 बजे गांव डंडियामई से विपुल के बाबा मित्रपाल सिंह आए और उन्होंने
दरवाजा खटखटाया, लेकिन किसी ने दरवाजा नहीं खोला। काफी देर आवाज लगाने और
दरवाजा खटखटाने के बाद उन्होंने खुद ही हाथ डाल कर अंदर लगी कुंडी खोली, तब
जाकर घटना का पता चला। उन्होंने मफलर खोलकर शव को उतारा और घटना की
जानकारी संजय को दी। परिवारीजनों ने बताया उनके जाते समय विपुल ने घर का
दरवाजा बंद कर टीवी चालू कर लिया था और घटना के बाद भी टीवी चलता मिला।
सूचना पर सीओ श्यामकांत, प्रभारी निरीक्षक श्रीप्रकाश यादव पुलिस के साथ
मौके पर पहुंच गए। पिता संजय ने आरोप लगाया कि उसके पुत्र की हत्या की गई
है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा
है।
नटखट तो था पर नहीं कर सकता आत्महत्या
शिकोहाबाद (ब्यूरो)।
संजय ने बताया कि उसकी सास सिरसागंज से आई थीं। उनका अल्ट्रासाउंड कराना
था। पत्नी प्रतिमा को भी तकलीफ थी। इस कारण दोनों को वह ले गया था। जाने से
पहले संजय ने विपुल को टॉफी भी दिलवाईं थीं। उन्होंने कहा कि विपुल नटखट
जरूर था लेकिन आत्महत्या जैसा कदम नहीं उठा सकता।
घटना से उठे सवाल
हत्या
और आत्महत्या के बीच मामले की गुत्थी उलझी है और सुलझाने के लिए पुलिस को
पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार है। कुछ परिस्थितियां ऐसी थी, जो मामले को
उलझा रही है। कमरे की चौखट में मफलर से फंदा बना था और नीचे सोफा रखा था।
परिवारीजनों की माने तो विपुल के पैर सोफे पर लटके थे। चौखट की लंबाई करीब
छह फीट है और विपुल की लंबाई भी चार फीट है। ऐसे में सोफे पर खड़े होकर
फांसी लगाना संभव ही नहीं है। मुख्य गेट की कुंडी बाहर से हाथ डाल कर खोली
जा सकती है। सवाल यही है कि विपुल ने गुस्से या खेल-खेल में फांसी लगाई या
फिर उसकी हत्या कर शव लटकाया गया।
मां का रो रोकर हुआ बुरा हाल
शिकोहाबाद।
अपने लाड़ले की मौत के बाद विपुल की मां प्रतिमा उर्फ अंशू अपने सुधबुध ही
खो बैठी। उसका रो-रोकर बुरा हाल था। वह अपने लाड़ले का चेहरा बार-बार
देखने की कहती और रोने लगती। वह पुलिस को भी विपुल का शव नहीं उठाने दे रही
थी। आस पड़ोस की महिलाएं उसे ढांढस बंधा रही थीं।