प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने छह मई को जिले को करोड़ों की सौगात दी। उन्होंने 74 करोड़ से अधिक के विकास कार्यों का लोकार्पण किया। इसमें 100 शैय्या का मातृ एवं शिशु चिकित्सालय, ट्रामा सेंटर के साथ शिकोहाबाद में आईटीआई भवन, एके कालेज का छात्रावास एवं कृषि विज्ञान प्रयोगशाला शामिल थीं। लोकार्पण को करीब दस दिन बीतने आ गए लेकिन यहां आमजन को सुविधा मिलना शुरू नहीं हो सकी हैं। कहीं स्टाफ अभाव तो कहीं पीपीपी माडल के तहत संचालन पर सिर्फ मंथन होता दिखाई दिया। यही कारण है कि अमर उजाला ने पड़ताल की तो कहीं ताला लटका दिखाई दिया तो कहीं सन्नाटा।
सौ शैय्याओं की मैटरनिटी विंग पर लटका है ताला
फीरोजाबाद। सीएम की करोड़ों की सौगात आमजन के लिए सुविधाजनक नहीं बन सकी। छह मई के दिन जब सीएम ने भारी भीड़ के मध्य करोड़ों की विकास योजनाओं के लोकार्पण का बटन दबाया तो हर किसी के चेहरे पर उम्मीद का भाव था। लेकिन एक सप्ताह से अधिक समय बीतने के बाद लोकार्पण वाली योजनाओं की पड़ताल की तो ताला लटका दिखा। 19 करोड़ 33 लाख की लागत से बने 100 शैय्या का मातृ एवं शिशु अस्पताल भले ही काफी हाईटेक बना हो। चिकित्सकों के अलग-अलग कक्ष। दूसरी मंजिल पर जाने को लिफ्ट, बाहर पार्किंग की व्यवस्था, आपातकालीन कक्ष भी हाईटेक। लेबर रूम को काफी बेहतर बनाया गया लेकिन यह अस्पताल आमजन के लिए अभी तक चालू नहीं हो सका। लोकार्पण के आठ दिन बीतने के बाद भी सिर्फ ताला लटका दिखाई दिया।
ट्रामा सेंटर में न स्टाफ न आधुनिक उपकरण
प्राइवेट ट्रामा सेंटर स्थापित हुआ तो सरकार ने घोषणा की कि हम सरकारी ट्रामा सेंटर बनाएंगे। हर किसी को लगा कि बेहतर उपचार मिलेगा। घोषणा के मुताबिक सरकार ने एक करोड़ 50 लाख 71 हजार रुपये खर्च किए। काफी आकर्षक ट्रामा सेंटर भवन बना। लेकिन बिना स्टाफ और हाईटेक उपकरण को मंगाए ही स्वास्थ्य विभाग के मुख्य सचिव के आदेश का पालन करते हुए इसे चालू करा दिया। हकीकत में देखें तो यहां सिर्फ पुरानी इमरजेंसी संचालित हुई है। आने वाले मरीज एवं तीमारदार भी कहने लगे कि ट्रामा सेंटर की परिभाषा यही है तो इतने पैसे खर्च करने की क्या जरूरत थी। इससे बेहतर तो पुरानी इमरजेंसी थी। कम से कम बीमार मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करने के लिए रिक्शा, टैंपो या फिर तीमारदारों को गोद में उठाने की जरूरत तो नहीं पड़ती थी।
अधूरे छात्रावास, कृषि प्रयोगशाला का लोकार्पण
शिकोहाबाद के एके कालेज में करोड़ों की लागत से छात्रावास बनाया गया। इस छात्रावास का निर्माण अभी तक पूरा नहीं हो सका। एके महाविद्यालय के प्राचार्य डा. आरके सिंह ने बताया कि पुरुष छात्रावास व कृषि प्रयोगशालाएं अभी पूर्ण नहीं हुई हैं। राजकीय निर्माण निगम द्वारा इनका निर्माण किया जा रहा है। निर्माण निगम ने कार्य पूर्ण नहीं किया है। हैंडओवर के बाद ही छात्रावास शुरू होगा। लोकार्पण पट्टिका अभी कालेज में नहीं आई है न ही प्रशासनिक स्तर से जानकारी दी गई।