गर्मी के कारण लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हो गया है।
चिलचिलाती धूप और भीषण गर्मी जानलेवा बनी है। आसमान से बरसती आग के कारण कमरे भट्ठी की मानिंद दहकने लगे हैं। कूलर, पंखे से भी गर्म हवा निकलने लगी है। लोगों का घरों से बाहर निकलना मुश्किल हुआ है। सबसे ज्यादा परेशानी स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को है।
इस साल गर्मी अपना पिछला सारा रिकार्ड तोड़ने पर अमादा है। अभी मई का पहला पखवारा ही चल रहा है, लेकिन पारा 43 पार हो चुका है। आसमान से सुबह नौ बजे से ही धूप नहीं आग बरसने लग रही है। इससे घर-बाहर कहीं भी राहत नहीं मिल रही है। दोपहर में तो कमरे दहकने लगते हैं। इससे पंखे, कूलर से भी लोगों को राहत नहीं मिल पा रही है। घर से बाहर निकलने पर लोग गमछा, दुपट्टा और छतरी से खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन इन इंतजामों से भी लोग गर्मी, धूप से खुद को बचा नहीं पा रहे हैं। गर्म हवाओं के थपेड़े जिस्म झुलसाते रहते हैं। इससे हीटस्ट्रोक का खतरा भी बढ़ गया है। सबसे ज्यादा दिक्कत तो स्कूल जाने वाले छोटे-छोटे बच्चों को हो रही है। बच्चे चिलचिलाती धूप में घर लौटते हैं, तो उनका चेहरा लाल हुआ रहता है।
पशु-पक्षियों के लिए पानी का संकट
रिकार्डतोड़ गर्मी और चिलचिलाती धूप के कारण गांव में कुएं, हैंडपंप और तालाबों का पानी सूखने लगा है। कई गांवों में तो सूखे पड़े तालाब के कारण पशुओं के पीने का पानी का संकट खड़ा हो गया। प्यास से बेहाल पशु, पक्षी पानी की तलाश में भटकते रहते हैं। पशुपालकों को भी जानवरों के पानी के इंतजाम में परेशानी झेलनी पड़ रही है।