फिरोजाबाद। आपराधिक वारदात के खुलाखे में सहयोग करते हुए जिन लोेगों ने पुलिस को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराए। अब वहीं उनके लिए मुसीबत बन गए। क्योंकि वारदात का खुलासा होने के बाद जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज कहां से उपलब्ध किए इसका जिक्र किया तो न्यायालय से कैमरा स्वामियों को भी नोटिस मिल गए। इसके कारण लोग परेशान है। क्योंकि गवाही देने के लिए अब उन्हें न्यायालय जाना होगा। हालांकि पुलिस अधिकारी इसे सामान्य प्रक्रिया मान रहे हैं। शहर में लूट की घटना हो या छिनैती, हत्या की वारदात हो या फिर किसी के साथ पिटाई की घटना, पुलिस सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से न सिर्फ अपराधी के करीब तक पहुंच जाती है। बल्कि घटना के खुलासे में सीसीटीवी फुटेज हकीकत भी उजागर कर देते हैं। यही कारण है कि पुलिस कोई घटना होने के बाद आसपास के घरों, प्रतिष्ठान पर लगे सीसीटीवी फुटेज को खोजती नजर आती है। यही नहीं खाकी द्वारा फुटेज मांगने पर लोग आसानी से उपलब्ध करा देते हैं। फुटेज लेने के बाद पुलिस अपनी विवेचना में उसे शामिल करती है।
इसमें किसके घर लगे कैमरा से फुटेज ली गई यह दर्ज होता है। यही कैमरा मालिक के लिए मुसीबत बन जाता है। क्योंकि पुलिस द्वारा गवाह इन लोगों को गवाह बनाया जा रहा है। इस तरह के मामले सामने आने के बाद सीसीटीवी कैमरा मालिकों की नींद उड़ी है।
केस एक
-करीब छह माह पूर्व वार्ड संख्या 26 में दिन दहाड़े एक महिला की गोली मारकर हत्या की घटना हुई थी। घटनास्थल के पास एक मकान में लगे सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस चंद घंटे में ही आरोपी तक पहुंच गई। घटना का खुलासा कर दिया। लेकिन एक सप्ताह पूर्व न्यायालय द्वारा जारी सम्मन को देख भवन स्वामी की चिंता बढ़ गई। भवन स्वामी परेशान है कि पहले से फुटेज दी अब न्यायालय जाना होगा।
केस दो
दूसरा घटनाक्रम छिंगामल के बाग क्षेत्र का है। चिकित्सक से परामर्श के बाद पति के साथ घर लौट रही एक स्कूटी सवार महिला के गले से लुटेरे सोने की चेन तोड़ कर भाग गए। पुलिस ने सीसीटीवी कैमरे की मदद से लुटेरों की पहचान सुनिश्चित कर चंद दिनों में ही सलाखों के पीछे भेज दिया। लेकिन इस घटना में भी पुलिस को सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध कराने वाले दुकान स्वामी सम्मन मिलने के बाद चिंता में है। उनका कहना है कि आखिर इस हाल में पुलिस का सहयोग कौन करेगा।
-न्यायालय प्रक्रिया में यह फुटेज कहां से लिए इसे सत्यापित कराने के कारण नाम का जिक्र करना पड़ता है। गवाही या अन्य किसी वैधानिक प्रक्रिया में कैमरा या भवन स्वामी को शामिल नहीं करेंगे। यह प्रक्रिया 65 बी धारा के तहत पूरी की जाती है। लोग घबराएं नहीं, उन्हें दिक्कत नहीं होने दी जाएगी।
सर्वेश मिश्र, एसपी सिटी