फीरोजाबाद में मनरेगा घोटाले की जांच के लिए सीबीआई को जिला प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा
है। जांच प्रभावित होने पर अब सीबीआई ने जिला प्रशासन को तीसरा पत्र जारी
कर खर्च से संबंधित पूरे अभिलेख मांगे हैं। पत्र मिलने के बाद तत्परता
दिखाते हुए सीडीओ ने सभी ब्लाकों के कार्यक्रम अधिकारियों को तीन दिन में
रिपोर्ट देने के आदेश दिए है। हालांकि सोमवार शाम तक किसी ब्लाक की रिपोर्ट
नहीं मिली।
महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के
तहत खर्च की गई धनराशि में गड़बड़ी की शिकायतें मिल रहीं थी। मामले में
सीबीआई ने जांच की तो कुशीनगर, संत कबीरनगर, गोंडा, बलरामपुर, महोबा,
मिर्जापुर, सोनभद्र में योजना के तहत काफी गड़बड़ी मिली थी। इन जिलों की
जांच के बाद हाईकोर्ट ने प्रदेश के सभी जनपदों से मनरेगा योजना में 2007 से
2010 के बीच खर्च धनराशि का ब्योरा मांगा था। ऐसे में योजना में गड़बड़ी
की आशंका सुहागनगरी में भी जताई जा रही थी।हालांकि यहां 2008-09 और 2009-10
दो वर्षों का ही ब्योरा एकत्रित करना है।
सीबीआई ने ब्योरा मांगा लेकिन
जिला प्रशासन आनाकानी करने लगा। मनरेगा से जुड़े सूत्रों की मानें तो पिछली
दो बार ब्लाकों में खर्च धनराशि का ब्योरा भेजा गया था लेकिन विभिन्न
विभागों के द्वारा ब्योरा देने में आनाकानी की गई। इसका कारण माना जा रहा
है कि सिंचाई विभाग एवं अन्य के विभागों ने मनमाने ढंग से मनरेगा की धनराशि
को खर्च किया था। सीबीआई के निर्देश पर आयुक्त ग्राम्य विकास द्वारा नौ
जनवरी को जिला प्रशासन को पत्र भेजा गया, जिसमें स्पष्ट था कि शीघ्र पूरा
विवरण के साथ अभिलेख मुहैया कराएं।
सीबीआई को पूर्व में मनरेगा
योजना में कराए कार्यों की सूची भेजी गई थी। लेकिन अब ब्योरा (मस्टर रॉल)
तलब किया गया है। सभी ब्लाकों के साथ लाइन डिपार्टमेंट को पत्र भेजकर
ब्योरा मांगा गया है।
सुजीत कुमार, सीडीओ फीरोजाबाद