फिरोजाबाद। मोबाइल फोन का अधिक उपयोग मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बनता जा रहा है। इसी कारण मेडिकल कॉलेज में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बच्चों से लेकर युवा सबसे ज्यादा चपेट में आ रहे हैं। महिलाएं भी इस रोग का शिकार बन रही हैं।मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विभाग की ओपीडी में तीन माह पूर्व 60 से 70 मरीज ही उपचार के लिए आते थे। अब मानसिक रोगियों की संख्या 120 तक पहुंच रही है। इस समय युवाओं के साथ बुजुर्गों को भी इन समस्या ने अपने आगोश में ले रखा है। पिछले तीन महीने में लगभग 2500 मरीज इलाज कराने आए। इनमें से दो हजार रोगी नए हैं। नवंबर में अभी 19 दिन ही बीते हैं, लेकिन अब तक मनोरोग ओपीडी में 750 रोगी उपचार के लिए आए हैं। इन रोगियों में सिर दर्द, डिप्रेशन के अधिक मरीज हैं। काउंसिलिंग में पता चला कि मोबाइल फोन के अधिक इस्तेमाल से भी लोग तनावग्रस्त हो रहे हैं।
मनोरोग चिकित्सक डॉ. अरुशिखा सिंह ने बताया कि बहुत से लोग डिमेंशिया, एंजाइटी जैसी कई समस्याओं से जूझ रहे हैं। मोबाइल का बढ़ता प्रयोग याददाश्त कमजोर कर रहा है। इनमें 20 से 40 वर्ष के लोगों की संख्या अधिक रहती है। ऐसे मरीजों को इलाज करने के साथ उन्हें जागरूक भी किया जाता है। चिकित्सक का कहना है कि ऐसी किसी समस्या होने पर तत्काल चिकित्सक से संपर्क करें। मोबाइल का ज्यादा प्रयोग करने से बचना चाहिए।
ये लक्षण हैं तो मनोचिकित्सक से जरूर लें सलाह
मनोचिकित्सक का कहना है कि अगर घबराहट रहती है, डर लगता है, बेचैनी, शरीर में कंपन रहना। इसके साथ ही दिल की धड़कन बढ़ना, तनाव महसूस करना, सिर में दर्द, हाथ-पैर में पसीना आता है या फिर बार-बार ये मन में आता है कि बुरा होने वाला है तो डॉक्टर से जरूर सलाह लें।
दूसरे के साथ बात को करें साझा
गर्मी में मानसिक रोगियों की संख्या बढ़ रही है। बेचैनी और नींद न आने की समस्या रहती है। जिन मरीजों की दवाई चल रही है वह लेते रहें। इसके अलावा लोग अपने मन की बात दूसरों के साथ साझा जरूर करें। कम से कम आधा घंटा व्यायाम जरूर करें। फास्ट फूड से परहेज करें। पानी ज्यादा से ज्यादा पीयें। सोने से करीब डेढ़ घंटा पहले मोबाइल छोड़ दें।
डाॅ. निमित गुप्ता, न्यूरोसर्जन